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अरघ के बेर हो पूजन के बेर लिरिक्स: अनुराधा पौडवाल का रुला देने वाला छठ गीत!

अरघ के बेर लिरिक्स (Aragh Ke Ber - Anuradha Paudwal) जब घाट पर भोर की ठंडी हवाएं चलती हैं और हर व्रती की आँखें आसमान में भगवान भास्कर को तलाश रही होती हैं, तब अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गूंजने वाला गीत— "उगs हो सुरुज देव अरघ के बेर" , संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर देता है। यह गीत समाज की उस अटूट समानता का प्रतीक है, जहाँ हर वर्ग सूर्य देव की आराधना के लिए एक ही घाट पर खड़ा है। इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में इसी प्रकार की सामाजिक समरसता को समझा था। चाहे वह "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" का समर्पण हो या फिर "पहिले पहिल हम कईनी" की अपार श्रद्धा— हर गीत में छठ का मूल भाव एक ही है। यह गीत हमारी भारतीय संस्कृति और "अंगना में पोखरी खनायब" जैसी लोक-परंपराओं का वह जीता-जागता उदाहरण है, जो समाज के सभी भेदों को मिटाकर हमें एक कर देता है। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और साथ में गाएं ...