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डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै लिरिक्स: सूर्य देव की सबसे पवित्र पुकार!

डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै लिरिक्स (Domin Beti Sup Nene Thaadh Chhai) छठ पर्व की सबसे बड़ी महिमा इसकी सामाजिक समरसता और समानता में निहित है। जब अर्घ्य देने का समय आता है, तो भगवान भास्कर के सामने न कोई अमीर होता है न कोई गरीब, न कोई ऊँचा और न कोई नीचा। इस अलौकिक समानता का सबसे सुंदर वर्णन मैथिली लोकगीत "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" में देखने को मिलता है। इस गीत में भक्त पूरी बेचैनी से सूर्य देव के उगने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे पहले हमने "कोन जल पटैबS मालिन" में मालिन द्वारा गूंथी पवित्र माला देखी, "अंगना में पोखरि खुनायल" में घाट की सजावट देखी और "कांचहि बांस केर गहबर" व "अपने तS जाइ छ हो भैया" में अटूट पारिवारिक रिश्तों को समझा। साथ ही, हमरो के पार लगैया और हमरो पर होइयौ सहाय ने हमें आस्था की शक्ति दिखाई। यह गीत आपको एक बार फिर हमर मनक गाँव की पुरानी यादों में ले जाएगा। आइए, भारतीय संस्कृति के इस पवित्र गीत के बोल और अर्थ को आत्मसात करें। ...