केरबा जे फड़ल छै घौद सँ लिरिक्स (Kerba Je Fadal Chhai Ghaudsan) छठ पूजा की पवित्रता और उसके कड़े नियमों (Purity rules) को अगर किसी एक गीत ने सबसे अच्छी तरह समझाया है, तो वह है— "केरबा जे फड़ल छै घौद सँ" । यह केवल एक गीत नहीं है, बल्कि बिहार और मिथिलांचल की संस्कृति का सबसे बड़ा एंथम (Anthem) बन चुका है। इसमें बताया गया है कि सूर्य देव को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद कितना शुद्ध होना चाहिए, जिसे एक पक्षी (तोता) भी जूठा नहीं कर सकता। हमारी लोकगीत शृंखला में आपने "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" में घाट पर समाज की समता, "कोन जल पटैबS मालिन" में गंगाजल की पवित्रता, "अंगना में पोखरि खुनायल" में आँगन का घाट, और "अपने तS जाइ छ हो भैया" में भाई-बहन के प्रेम को महसूस किया। इसके अलावा हमरो के पार लगैया , हमरो पर होइयौ सहाय और कांचहि बांस केर गहबर जैसे गीतों ने हमें छठी मईया के करीब लाया। यह गीत भी मिथिला के धिया सिया और हमर मनक गाँव की माटी की खुशबू से ओत-प्रोत है। आइए, भारतीय...