अंगना में पोखरि खुनायल लिरिक्स (Angana Meh Pokhari Khunaayal) जैसे ही कार्तिक का महीना दस्तक देता है, घर के आँगन में साफ-सफाई और उत्सव का माहौल छा जाता है। छठी मईया के स्वागत की तैयारियाँ एक अलग ही उत्साह भर देती हैं। यह गीत— "अंगना में पोखरि खुनायल, छठि मइया अयतन आइ" (Angana Meh Pokhari Khunaayal), उसी पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है, जहाँ व्रती महिलाएँ अपने घर के आँगन में ही घाट बनाने और माता के स्वागत की कल्पना करती हैं। इससे पहले हमने "अपने तS जाइ छ हो भैया" में भाई-बहन का प्रेम, "हमरो के पार लगैया" में आस्था की नाव, "हमरो पर होइयौ सहाय" में माँ की ममता और "कांचहि बांस केर गहबर" में सामाजिक समरसता को समझा था। यह नया गीत आपको हमर मनक गाँव की वह सोंधी महक और मिथिला के धिया सिया जैसी पवित्रता का अहसास कराएगा। आइए, भारतीय संस्कृति के इस मधुर गीत के बोल और अर्थ में डूब जाएँ। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और साथ में गाएं ...