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हमरो के पार लगैया परमेसरी मइया लिरिक्स: मन मोह लेने वाला छठ गीत!

हमरो के पार लगैया, परमेसरी मइया लिरिक्स (Hamro Ke Par Lagaiya) छठ पर्व की महिमा शब्दों में बाँधी नहीं जा सकती, इसे केवल महसूस किया जा सकता है। जब घाट पर दीये टिमटिमाते हैं और हवाओं में छठी मईया के कर्णप्रिय मैथिली गीत गूंजते हैं, तो हर आँख नम हो जाती है। ऐसे ही भावुक गीतों की शृंखला में एक अत्यंत मनमोहक गीत है— "हमरो के पार लगैया, परमेसरी मइया" । इससे पिछले लेख में हमने "हमरो पर होइयौ सहाय हे छठी मईया" के आंसुओं से भीगे अर्थ को जाना था। यह नया गीत केवल एक लोकगीत नहीं है, बल्कि मिथिला के धिया सिया जैसे गीतों की तरह आस्था की वह नाव है, जो हमें भवसागर पार लगाती है। इसे गुनगुनाते ही मन में हमर मनक गाँव की वह सोंधी महक और बिहार के आध्यात्मिक घाटों का अद्भुत दृश्य उभर आता है। आइए, इस पावन लोकगीत के बोल और अर्थ में डूब जाएँ। संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) के समय घाट पर दीप जलाते हुए श्रद्धालु, जहाँ आस्था के गीत गूंजते हैं। ...