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हे छठि मैया हरु दुख मोर हे लिरिक्स: परदेसी का रुला देने वाला छठ गीत!

हे छठि मैया हरु दुख मोर हे लिरिक्स (He Chhathi Maiya Haru Dukh Mor) जब छठ पूजा का पावन पर्व आता है, तो गाँव की माटी की खुशबू हर उस परदेसी (प्रवासी) को सताने लगती है, जो अपने घर से दूर है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'मिथिला मखान' (Mithila Makhaan) का यह सुप्रसिद्ध गीत— "हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे" , उसी घर की याद, आँगन की रौनक और छठी मईया से अपने सारे दुखों को हरने (दूर करने) की करुण पुकार है। हमारे पिछले लेखों में आपने "सोना सट कुनिया हो दीनानाथ" में भगवान के चमत्कारों को देखा, "हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ" में एक निस्संतान माँ का दर्द महसूस किया और "हमर मनक गाँव" की उदासीन गलियों को याद किया। यह नया गीत मिथिला के धिया सिया के उस गौरव को दर्शाता है, जहाँ सुख-दुख सब कुछ समाज के साथ साझा किया जाता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे रक्षाबंधन की भावुक कविताओं में भाई-बहन का अटूट प्रेम झलकता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस आधुनिक लेकिन जड़ों से जुड़े गीत में खो जाएँ। ...