पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स (Pahile Pahile Hum Kaini) छठ महापर्व के कठोर नियमों को देखकर जब कोई महिला जीवन में पहली बार यह व्रत (Fast) उठाती है, तो उसके मन में अपार श्रद्धा के साथ-साथ एक घबराहट भी होती है कि कहीं पूजा में कोई चूक न हो जाए। इसी असीम भक्ति, समर्पण और भय के सुंदर मिश्रण को दर्शाता है यह अमर गीत— "पहिले पहिल हम कईनी छठी मईया व्रत तोहार" । इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में देखा था कि कैसे समाज का हर वर्ग भगवान भास्कर के सामने नतमस्तक होता है। यह नया गीत व्यक्तिगत समर्पण की पराकाष्ठा है। इसमें एक माँ अपने आँगन के बच्चे (गोदी के बलकवा) और पति के प्यार के लिए छठी मईया के सामने हाथ फैलाती है। यह गीत सुनकर आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हर व्यक्ति की आँखें छलक उठती हैं। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया से प्रार्थना करें घाट पर दीप जलाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हुई एक सुह...