हमरो पर होइयौ सहाय, हे छठि मइया लिरिक्स (Hamaro Par Hoiau Sahaay) छठ पर्व केवल एक व्रत नहीं है, यह एक माँ की ममता और उसके असीम त्याग का सबसे बड़ा प्रतीक है। जब एक व्रती महिला जल में खड़ी होकर सूर्य देव और छठी मईया से अपने परिवार के लिए प्रार्थना करती है, तो उसके होंठों पर जो सबसे भावुक गीत आता है, वह है— "हमरो पर होइयौ सहाय, हे छठि मइया" । इससे पहले हमने कांचहि बांस केर गहबर लिरिक्स के गहरे अर्थ को समझा था। यह नया गीत हर उस माँ की पुकार है जो अपने बच्चों, पति और पूरे परिवार की सुख-शांति के लिए छठी मईया से मन्नत मांगती है। यह गीत सुनकर आपको हमर मनक गाँव (Hamar Manak Gaon) जैसी उदासीन और पुरानी यादों वाली कविताओं की तरह अपने पैतृक घर की याद आ जाएगी। आइए, भारतीय संस्कृति के इस अनमोल मोती के भावार्थ को गहराई से समझें। उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को नमन करती एक माँ, जो छठी मईया से अपने परिवार के लिए 'सहाय' (कृपा) मांग रही है। ...