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बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ लिरिक्स: एक स्त्री की रुला देने वाली पुकार!

बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ लिरिक्स (Ber Ber Arajalaun He Dinanath) मैथिली लोकगीतों में छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन के यथार्थ और एक स्त्री के संघर्ष का सबसे सच्चा दर्पण है। "बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ" एक ऐसा रुला देने वाला गीत है, जहाँ एक दुखी महिला भगवान भास्कर (दीनानाथ) से अपने पिछले जन्म के पापों और इस जन्म के दुखों का हिसाब मांगती है। इससे पहले हमने "हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ" में एक निस्संतान महिला (बाँझिन) का सामाजिक दर्द महसूस किया था। हमने "केरबा जे फड़ल छै घौद सँ" में पवित्रता के नियम, "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" में समानता, और "अपने तS जाइ छ हो भैया" में पारिवारिक प्रेम को समझा। ये सभी गीत हमर मनक गाँव की वह सच्ची तस्वीरें हैं जो मिथिला के धिया सिया के जीवन को दर्शाती हैं। आइए, भारतीय संस्कृति के इस अत्यंत मार्मिक लोकगीत के गहरे अर्थ में गोता लगाएँ। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया से प्रार्थना क...