सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

sun-god-devotion-bhakti लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अरघ के बेर हो पूजन के बेर लिरिक्स: अनुराधा पौडवाल का रुला देने वाला छठ गीत!

अरघ के बेर लिरिक्स (Aragh Ke Ber - Anuradha Paudwal) जब घाट पर भोर की ठंडी हवाएं चलती हैं और हर व्रती की आँखें आसमान में भगवान भास्कर को तलाश रही होती हैं, तब अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गूंजने वाला गीत— "उगs हो सुरुज देव अरघ के बेर" , संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर देता है। यह गीत समाज की उस अटूट समानता का प्रतीक है, जहाँ हर वर्ग सूर्य देव की आराधना के लिए एक ही घाट पर खड़ा है। इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में इसी प्रकार की सामाजिक समरसता को समझा था। चाहे वह "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" का समर्पण हो या फिर "पहिले पहिल हम कईनी" की अपार श्रद्धा— हर गीत में छठ का मूल भाव एक ही है। यह गीत हमारी भारतीय संस्कृति और "अंगना में पोखरी खनायब" जैसी लोक-परंपराओं का वह जीता-जागता उदाहरण है, जो समाज के सभी भेदों को मिटाकर हमें एक कर देता है। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और साथ में गाएं ...

पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स: पहली बार छठ करने वालों का सबसे भावुक गीत!

पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स (Pahile Pahile Hum Kaini) छठ महापर्व के कठोर नियमों को देखकर जब कोई महिला जीवन में पहली बार यह व्रत (Fast) उठाती है, तो उसके मन में अपार श्रद्धा के साथ-साथ एक घबराहट भी होती है कि कहीं पूजा में कोई चूक न हो जाए। इसी असीम भक्ति, समर्पण और भय के सुंदर मिश्रण को दर्शाता है यह अमर गीत— "पहिले पहिल हम कईनी छठी मईया व्रत तोहार" । इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में देखा था कि कैसे समाज का हर वर्ग भगवान भास्कर के सामने नतमस्तक होता है। यह नया गीत व्यक्तिगत समर्पण की पराकाष्ठा है। इसमें एक माँ अपने आँगन के बच्चे (गोदी के बलकवा) और पति के प्यार के लिए छठी मईया के सामने हाथ फैलाती है। यह गीत सुनकर आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हर व्यक्ति की आँखें छलक उठती हैं। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया से प्रार्थना करें घाट पर दीप जलाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हुई एक सुह...

केरबा जे फड़ल छै घौद सँ लिरिक्स: छठी मईया का सबसे प्रसिद्ध गीत!

केरबा जे फड़ल छै घौद सँ लिरिक्स (Kerba Je Fadal Chhai Ghaudsan) छठ पूजा की पवित्रता और उसके कड़े नियमों (Purity rules) को अगर किसी एक गीत ने सबसे अच्छी तरह समझाया है, तो वह है— "केरबा जे फड़ल छै घौद सँ" । यह केवल एक गीत नहीं है, बल्कि बिहार और मिथिलांचल की संस्कृति का सबसे बड़ा एंथम (Anthem) बन चुका है। इसमें बताया गया है कि सूर्य देव को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद कितना शुद्ध होना चाहिए, जिसे एक पक्षी (तोता) भी जूठा नहीं कर सकता। हमारी लोकगीत शृंखला में आपने "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" में घाट पर समाज की समता, "कोन जल पटैबS मालिन" में गंगाजल की पवित्रता, "अंगना में पोखरि खुनायल" में आँगन का घाट, और "अपने तS जाइ छ हो भैया" में भाई-बहन के प्रेम को महसूस किया। इसके अलावा हमरो के पार लगैया , हमरो पर होइयौ सहाय और कांचहि बांस केर गहबर जैसे गीतों ने हमें छठी मईया के करीब लाया। यह गीत भी मिथिला के धिया सिया और हमर मनक गाँव की माटी की खुशबू से ओत-प्रोत है। आइए, भारतीय...