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उगह हो सूरज देव लिरिक्स: अनुराधा पौडवाल का रुला देने वाला छठ गीत!

उगह हो सूरज देव लिरिक्स (Ugaha Ho Suraj Dev Bhel Bhinsarva) सूर्योदय का वह अलौकिक दृश्य जब लाखों हाथ एक साथ आसमान की ओर उठते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती स्वयं स्वर्ग बन गई हो। अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गाया गया— "उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा" , छठ महापर्व का सबसे प्रतिष्ठित और हृदय को बेध देने वाला गीत है। यह गीत केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सूर्य देव से की गई सीधी गुहार है। इससे पहले हमने "अंगना में पोखरी खनायब" में देखा कि कैसे घर के आँगन को ही पवित्र घाट बना दिया जाता है। इस गीत में भगवान भास्कर के प्रति जो आस्था और ऊर्जा निहित है, उसकी तुलना सीधे तौर पर "राम की शक्ति पूजा (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)" की असीम ऊर्जा और संकल्प से की जा सकती है। निराला जी की रचना में जहाँ भगवान राम सूर्य की उपासना कर शक्ति का आह्वान करते हैं— "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन...