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जगदम्बा घर में दियरा - Sharda Sinha | Jagdamba Ghar Mein Diyara Lyrics in Hindi & Maithili

भारतीय लोक संगीत की समृद्ध परंपरा में, बहुत कम गीत ऐसे हैं जो घर की पवित्रता और आध्यात्मिकता को इतनी गहराई से छूते हैं, जितना कि "जगदम्बा घर में दियरा" । जैसे ही शारदीय हवाओं में ठंडक घुलती है और नवरात्रि का आगमन होता है, बिहार और उत्तर प्रदेश के हर घर में पद्म भूषण शारदा सिन्हा की आवाज़ में यह आइकॉनिक मैथिली देवी पचरा गूंजने लगता है। यह केवल एक भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक अनुष्ठान है। "यह गीत ‘घर’ को मंदिर में नहीं बदलता, बल्कि मंदिर को घर में उतार लाता है।" यह 'आगमन' का उत्सव है, जहाँ देवी को किसी दूरस्थ देवता के रूप में नहीं, बल्कि घर लौटी एक प्रिय बेटी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि में ‘जगदम्बा घर में दियरा’ गीत के साथ माँ दुर्गा की आरती और भोग का दृश्य मिथिला की संस्कृति में रचा-बसा यह गीत माँ जगदम्बा के प्रति एक भक्त के कोमल आतिथ्य का वर्णन करता है—मिट्टी का दिया जलाने से लेकर गंगाजल से उनके चरण पखारने तक। शारदा सिन्हा की गायकी इस गीत को मंचीय ...
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के पतिआ लए जाएत रे - विद्यापति गीत | भावार्थ, विश्लेषण और रहस्य (Ke Patiya Lae Jaet Re)

मिथिला के कोकिल और शृंगार रस के अप्रतिम चितेरे महाकवि विद्यापति की लेखनी से निकला हर शब्द, विरह की अग्नि में तपकर कुंदन बन गया है। भारतीय साहित्य में जब भी ' विप्रलंभ शृंगार ' (वियोग) की चर्चा होती है, तो विद्यापति का पद " के पतिआ लए जाएत रे " (Ke Patiya Lae Jaet Re) अनायास ही हृदय को झकझोर देता है। "Ke Patiya Lae Jaet Re..." The quintessential image of the Virahini Nayika clutching the letter she cannot send. सावन की घनघोर घटाओं के बीच एक विरहिणी नायिका की पीड़ा, उसका एकाकीपन और संदेश भेजने की आकुलता—इस गीत में मानवीय संवेदनाओं का महासागर उमड़ता है। महाकवि विद्यापति ने इसमें न केवल लोक-जीवन की व्यथा उकेरी है, बल्कि आध्यात्मिक दर्शन का भी गहरा पुट दिया है। साहित्यशाला के इस विशेष आलेख में, हम इस कालजयी रचना का पीएचडी-स्तरीय गहन विश्लेषण , शब्दार्थ और भावार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं। मूल पद: के पतिआ लए जाएत रे के पतिआ लए जाएत रे, मोरा पिअतम पास। हिए नहि सहए अस...

पिया मोर बालक, हम तरूणि गे - अर्थ, व्यंग्य और बाल विवाह | Vidyapati Geet Analysis

प्रस्तावना: विडंबना और वेदना का अद्वितीय संगम मैथिली साहित्य के गगन में महाकवि विद्यापति ध्रुवतारे के समान चमकते हैं। उनकी लेखनी ने जहाँ एक ओर भक्ति की सरिता बहाई, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों पर इतना तीखा प्रहार किया कि वह आज भी प्रासंगिक है। जब हम विद्यापति की जीवनी और कविताओं का अध्ययन करते हैं, तो पाते हैं कि उन्होंने स्त्री-मन की उन गहराइयों को स्पर्श किया है जहाँ पीड़ा शब्द नहीं, बल्कि आह बन जाती है . "पिया के देखैत मोरा दगध शरीर" – The contrast between the cold social environment and the internal fire of anguish felt by the bride. प्रस्तुत गीत, "पिया मोर बालक, हम तरूणि गे!" केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि तत्कालीन मिथिला समाज में व्याप्त बाल-विवाह (अनमेल विवाह) की प्रथा पर एक करारा तमाचा है। यह गीत एक ऐसी 'तरुणी' (युवती) की व्यथा है जिसका विवाह एक अबोध 'बालक' से कर दिया गया है। आइए, इस कालजयी रचना के मर्म को समझें। 📜 मूल रचना पिया मोर बालक, हम तरूणि गे! क...

Mithila / Madhubani Painting: The Ultimate Guide to History, Styles, and Techniques

Mithila / Madhubani Painting: The Folk Art That Travelled from Mud Walls to World Museums Imagine an art form so ingrained in the soil of a civilization that it survived not on canvas, but on the mud walls of village huts for centuries. This is the essence of Madhubani Painting , globally celebrated as Mithila Art. Originating from the ancient Videha region (modern-day Mithila in Bihar and Nepal), this art form is a vibrant chronicle of life, nature, and the divine. Legend has it that King Janaka commissioned artists to paint the entire kingdom to celebrate the wedding of his daughter, Sita, to Lord Rama. From those mythological beginnings to receiving the prestigious GI (Geographical Indication) Tag , Mithila has nurtured this tradition as a living, breathing entity. Quick Summary: This comprehensive guide covers the history of Mithila art, its 5 distinct styles (Bharni, Kachni, etc.), symbolic meanings, and traditional techniques. Whether you are looking for Ma...

Mithila Painting Symbols: Why Fish & Tortoise? History & Meaning

मिथिला चित्रकला (Mithila Painting) केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक "दृश्य दर्शन" (Visual Philosophy) है। जिसे दुनिया आज मधुबनी पेंटिंग के नाम से जानती है, वह असल में मिथिला की स्त्रियों द्वारा सदियों से दीवारों पर लिखा गया एक मौन शास्त्र है। जब आप किसी कोहबर (Kohbar) को देखते हैं, तो आप केवल चित्र नहीं देख रहे होते, बल्कि आप एक पूरी सभ्यता की प्रार्थना को पढ़ रहे होते हैं। Local women in Bihar meticulously painting the sacred symbols of the fish (representing fertility and life flow) and the tortoise (representing stability and patience) on a mud wall, continuing the centuries-old Mithila tradition. अक्सर कला प्रेमियों और शोधकर्ताओं के मन में यह प्रश्न उठता है: “मिथिला पेंटिंग में मछली और कछुआ का क्या अर्थ है” (Meaning of Fish and Tortoise in Mithila Painting) ? आखिर विवाह के शुभ अवसर पर यही दो जीव क्यों बन...

Jug Jug Jiya Su Lalanwa Lyrics & Meaning | जुग जुग जियसु ललनवा

Jug Jug Jiya Su Lalanwa – Maithili Sohar Lyrics, Meaning & Cultural Analysis मिथिला की लोक-संस्कृति में शिशु का जन्म केवल एक पारिवारिक घटना नहीं होता—यह पूरे घर और कुल के भाग्य के जागरण का उत्सव होता है। ऐसे ही पावन अवसर पर गाया जाने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध मैथिली सोहर (Sohar) है — “जुग जुग जियसु ललनवा” (Jug Jug Jiya Su Lalanwa) । A mother gently blessing her newborn while women sing the Maithili Sohar “Jug Jug Jiya Su Lalanwa” — a traditional birth song of Mithila. यह गीत किसी मंदिर या मंच के लिए नहीं, बल्कि आँगन, किवाड़ और घरेलू स्त्रियों की सामूहिक स्मृति के लिए रचा गया है। मैथिली परंपरा में ललनवा शब्द केवल पुत्र नहीं, बल्कि नवजात शिशु—पुत्र या पुत्री—दोनों के लिए प्रेम, आशा और वंश-दीपक का प्रतीक है। मैथिली परंपरा में “सोहर” क्या है? सोहर...