सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Maithili लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

करूणा भरल ई गीत हम्मर | Karuna Bharal Ee Geet Hammar (Maithili Lyrics & Meaning)

मैथिली साहित्य में करुणा और वेदना (Pain and Compassion) का स्थान अत्यंत गहरा है। जहाँ विद्यापति की नचारी में भक्ति की करुणा है, वहीं आधुनिक मैथिली कविता में टूटे हुए सपनों की टीस है। आज हम मैथिली कवि धीरेन्द्र (Dhirendra) की एक अत्यंत भावुक रचना "करूणा भरल ई गीत हम्मर" (Karuna Bharal Ee Geet Hammar) का पाठ और विश्लेषण करेंगे। यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे हृदय की पुकार है जिसने 'नंदन वन' (स्वर्ग) बसाने का सपना देखा था, लेकिन उसे नसीब हुए सिर्फ 'अंगार' (Embers)। आइये, इस रचना की गहराइयों में उतरें। "अश्रुटा उपहार..." - A song of compassion and loss. करूणा भरल ई गीत हम्मर कवि: धीरेन्द्र करूणा भरल ई गीत हम्मर, प्राणकेर झंकार। दए रहल छी हम जगतकें अश्रुटा उपहार। सोचने छलहुँ दुनियाँ बसाबी, सोचने छलहुँ नन्दन लगाबी, स्वप्न छल जे बस उतारी स्वर्ग हम साकार। ह...

दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ: पारंपरिक मैथिली विवाह गीत (Lyrics & Meaning) | Mithila Vivah Geet

मिथिला की संस्कृति, यहाँ के लोकगीत और यहाँ की मिठास पूरी दुनिया में अद्वितीय है। विवाह संस्कार में जब नई नवेली दुल्हन (दुलहिन) ससुराल की गलियों में कदम रखती है, तो यह गीत 'दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ' (Dulhin Dhire Dhire Chaliyau) एक मीठी हिदायत और स्वागत के रूप में गाया जाता है। 'दुल्हा धीरे-धीरे चल्यो' जैसे गीत इन्ही पारंपरिक रस्मों की शोभा बढ़ाते हैं। जिस प्रकार महाकवि विद्यापति ने मैथिली साहित्य को ऊंचाइयों पर पहुँचाया, उसी प्रकार हमारे पारंपरिक विवाह गीतों ने हमारी संस्कृति को जीवित रखा है। नीचे इस प्रसिद्ध गीत के लिरिक्स, हिंग्लिश अनुवाद और पीडीएफ डाउनलोड लिंक दिए गए हैं। Maithili Lyrics: Dulhin Dhire Dhire Chaliyau दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ ससुर गलिया, दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ ससुर गलिया। ससुर गलिया हो, भैंसूर गलिया, दुलहिन सासु सँ बोलियौ मधुर बोलिया। दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ ससुर गलिया। मधुर बोलिया हो, अनार कलिया, मधुर बोलिया हो, अनार कलिया। दुलहिन ननदि के दियौ हजार डलिया, दुलहिन धीरे-धीरे चलियौ ससुर गलिया। हजार डलिया हो, गुलाब कलिया, हजार डलिया हो, गुल...