चन्द्रमाक मृत्यु - हरिमोहन झा (संपूर्ण कविता पाठ एवं व्यंग्य विश्लेषण) क्या हो जब सदियों से चला आ रहा 'चाँद' का रोमांटिक मिथक एक झटके में टूट जाए? आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष अन्वेषण ने साहित्यिक उपमाओं की कैसे धज्जियां उड़ाई हैं , इसका सबसे शानदार और व्यंग्यात्मक उदाहरण है हरिमोहन झा जी की अमर रचना— 'चन्द्रमाक मृत्यु' (Chandramak Mrityu) । मैथिली गद्य और पद्य में अपने तीखे व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध हरिमोहन झा ने इस कविता में कालिदास, विद्यापति और तुलसीदास जैसे महाकवियों पर भी मीठा कटाक्ष किया है। सदियों से जिस 'चंद्रमुख' (चाँद से चेहरे) की उपमा दी जाती थी, रॉकेट युग की 'चंद्रमुखी' जब चाँद पर उतरती है तो उसे वहां केवल ऊबड़-खाबड़ गड्ढे और धूल नज़र आती है। यह कविता पारंपरिक रोमांटिसिज़्म की मृत्यु और आधुनिक यथार्थवाद (Realism) के जन्म का उद्घोष करती है। नीचे प्रस्तुत है इस युग-प्रवर्तक रचना का संपूर्ण मूल पाठ (Full Lyrics) और उसका विस्तृत पद्यांश-वार विश्लेषण। ...
अकाल - हरिमोहन झा (संपूर्ण कविता पाठ एवं भावार्थ) प्रकृति की निर्ममता और समाज के खोखलेपन का ऐसा सटीक और तीखा चित्रण साहित्य में दुर्लभ है। सूखे की भीषण त्रासदी को दहेज लोभियों और सामाजिक कुरीतियों से जोड़ना केवल हरिमोहन झा जी की पैनी दृष्टि ही कर सकती है। मैथिली साहित्य के शिखर पुरुष हरिमोहन झा द्वारा रचित 'अकाल' (Akaal) महज़ एक प्राकृतिक आपदा का वर्णन नहीं है; यह एक गहरा सामाजिक व्यंग्य है। कवि ने बड़ी ही चतुराई से सूखे खेतों, उड़ती धूल और फटी हुई धरती की तुलना रूठे हुए दामाद, निर्लज्ज समधी, और दहेज के लोभी पिता से की है। नीचे प्रस्तुत है इस कालजयी रचना का संपूर्ण मूल पाठ (Full Lyrics) और उसका विस्तृत पद्यांश-वार विश्लेषण। हरिमोहन झा: जिन्होंने अपनी कलम से समाज की विडंबनाओं पर सबसे तीखा प्रहार किया। कविता का संपूर्ण मूल पाठ (Full Poem Lyrics) हथिया बरिसल...