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Chandramukhi San Gauri Hamar Chhaith Lyrics & Meaning | विद्यापति की महेशवाणी

चन्द्रमुखी सन गौड़ी हमर छथि: एक माता की पीड़ा, वात्सल्य और मनोवैज्ञानिक द्वंद्व का अमर गीत कल्पना कीजिए उस ऐतिहासिक क्षण की, जब एक अत्यंत कोमल और चन्द्रमा के समान शीतल कन्या (गौरी) के द्वार पर भस्म रमे, जटाधारी, गले में सर्प और बाघम्बर पहने हुए भगवान शिव वर के रूप में पधारते हैं। एक माता के हृदय पर उस क्षण क्या बीतती होगी? अपनी फूल सी बच्ची के लिए एक ऐसा "बेमेल" और डरावना वर देखकर किस माँ का कलेजा नहीं फट पड़ेगा? यह कोई साधारण लोककथा नहीं है। भगवान शिव ने यह भयंकर रूप जानबूझकर धरा था, ताकि राजपरिवार के लौकिक अहंकार को तोड़ा जा सके और उनके समर्पण की असली परीक्षा ली जा सके। इसी गहरे वात्सल्य, सदमे, और ईश्वरीय लीला के अद्भुत मनोवैज्ञानिक संगम को महाकवि विद्यापति ने अपनी कालजयी रचना "चन्द्रमुखी सन गौड़ी हमर छथि" (Chandramukhi San Gauri Hamar Chhaith) में पिरोया है। मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में इसे एक पवित्र 'महेशवाणी' (Maheshwani) के रूप मे...
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Baba Baidyanath Hum Aayal Chhi Bhikhariya Lyrics | Maithili Shiv Nachari Meaning & Video

Baba Baidyanath Hum Aayal Chhi Bhikhariya – Maithili Shiv Nachari Lyrics & Meaning मिथिलांचल की पावन भूमि पर भगवान शिव की आराधना केवल पूजा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संवाद (Emotional Dialogue) है। जब भी कोई भक्त अपनी दीनता, विवशता और सांसारिक कष्टों को लेकर महादेव के द्वार पर पहुँचता है, तो उसके कंठ से स्वतः ही फूट पड़ता है— "बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया।" "हे बाबा! मैं आपके द्वार पर एक भिखारी बनकर आया हूँ..." यह केवल एक लोकगीत या मैथिली नचारी नहीं है, बल्कि यह हर उस श्रद्धालु की पुकार है जो देवघर (Baidyanath Dham) के कामना लिंग के समक्ष नतमस्तक है। ठीक वैसे ही जैसे सुदामा श्री कृष्ण के द्वार पर अपनी दीनता लेकर गए थे, वैसे ही यहाँ भक्त शिव के द्वार पर खड़ा है। महाकवि विद्यापति ने जिस नचारी विधा को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कवि काशीनाथ ने इसमें भक्त और भगवान के बीच के अटूट रिश्ते को पिरोया है। चाहे शारदा सिन्हा की मर्मस्पर्शी आवाज़ हो या युवा मैथिली ठाकु...

Vidyapati Poems: Shiv Nachari Lyrics (Maithili/Hindi) & Meaning | एत जप-तप

महाकवि विद्यापति : शिव नचारी (एत जप-तप) कल्पना कीजिये उस माँ की पीड़ा की, जिसने अपनी कोमल पुत्री के लिए राजकुमार सोचा था, पर द्वार पर भस्म रमाये, सर्पों की माला पहने एक जोगी आ खड़ा हुआ। यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि लोक-व्यवहार और अध्यात्म का द्वंद्व है। 'मैथिल कोकिल' विद्यापति की यह प्रसिद्ध 'शिव नचारी' उसी वात्सल्य और चिंता का मर्मस्पर्शी चित्रण है। आइये, इस रचना का मूल पाठ, अंग्रेजी लिप्यंतरण (Lyrics) और सरल हिंदी भावार्थ पढ़ते हैं। The Ascetic Shiva: A Mother's Worry शिव नचारी (Maithili Lyrics) एत जप-तप हम की लागि कयलहु, कथि लय कयल नित दान। हमर धिया के इहो वर होयताह, आब नहिं रहत परान। नहिं छनि हर कें माय-बाप, नहिं छनि सोदर भ...

Pahilen Badri Kuch Pun Navrang: Vidyapati Pad Analysis | Vayas Sandhi Meaning

मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति केवल एक कवि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और शारीरिक मनोविज्ञान के एक कुशल चितेरे थे। जब हम मैथिली साहित्य की संरचना और उसके भविष्य पर विचार करते हैं, जैसा कि हमने अपनी Maithili Sahitya Structural Solutions Roadmap रिपोर्ट में चर्चा की है, तो हमें यह स्वीकारना पड़ता है कि विद्यापति की 'पदावली' वह नींव है जिस पर यह पूरा साहित्य खड़ा है। आज हम जिस पद "पहिलें बदरि कुच पुन नवरंग" का विश्लेषण कर रहे हैं, वह 'वयःसंधि' (Vayas Sandhi) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह बचपन और यौवन के बीच की वह दहलीज है जहाँ शरीर बदलता है और मन 'अनंग' (कामदेव) की पीड़ा और कौतूहल से भर जाता है। जिस तरह बाबा नागार्जुन ने अपनी कविताओं में राजनीतिक विप्लव को देखा—उदाहरण के लिए Khichdi Viplav Dekha Humne —उसी तीव्रता से विद्यापति ने यहाँ 'शारीरिक विप्लव' (Physical Revolution) को देखा है। Vidyapati Pad: Pahilen Badri Kuch Pun Navrang (Lyrics) विद्यापति के शृंगारिक पदों में उपमाओं (Metaphors) का प्रयोग विज्ञान क...

रंगीला ई बिहार भ गेलै Lyrics – विक्रम बिहारी | Rangeela Bihar Event & Maithili Culture

होम » मैथिली लोकगीत » रंगीला ई बिहार भ गेलै रंगीला ई बिहार भ गेलै लिरिक्स – विक्रम बिहारी | रंगीला बिहार इवेंट (पवन सिंह) बिहार की अस्मिता, संस्कृति और 'रंगीला बिहार' 2026 महा-आयोजन का उत्सव। "रंगीला ई बिहार भ गेलै" (Rangila E Bihar Bha Gelae) केवल एक गीत की पंक्ति नहीं है, बल्कि यह बदलते बिहार और उसकी सांस्कृतिक चेतना का उद्घोष है। हाल ही में विक्रम बिहारी (Vikram Bihari) द्वारा गाया गया यह मैथिली गीत सोशल मीडिया और सांस्कृतिक मंचों पर खूब गूंज रहा है। साहित्यिक दृष्टिकोण से देखें, तो यह गीत विस्थापन, संघर्ष और अपनी जड़ों के प्रति प्रेम के बीच खड़े बिहारी मन की आवाज़ है। जिस तरह मिथिले (Mithile) कविता में क्षेत्र के गौरव का गान है, वैसे ही यह गीत आधुनिक बिहार की 'रंगीनियत' यानी उसकी विविधता को दर्शाता है। इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर में होने वाले आगामी 'रंगीला बिहार' (Rangeela Bihar) इवेंट, जिसका नेतृत्व पावरस्टार पवन सिंह कर रहे हैं, ने इस वाक्यांश को एक आंदोलन का ...