'कन्यादान' - बेटीक विदाई पर पिताक हृदयक मार्मिक गान बेटीक विदाईक ओ क्षण: जखन कठोर पिताक नोर सेहो नहि रुकैत अछि! विवाह जीवनक सभसँ पैघ खुशीक अवसर थिक, मुदा 'विदाई' ओ पल थिक जखन सम्पूर्ण घरक हृदय फाटि जाइत अछि। मैथिली साहित्य मे बेटीकें घरक इजोरिया मानल गेल अछि। जखन ई इजोरिया अपन घर छोड़ि पराया घर जाइत अछि, तँ आँगन मे एकटा एहन अन्हार जनि (Aanhar Janni) पसारि जाइत अछि जकरा कोनो दीया नहि मेटा सकैत अछि। जहिना हमसभ मुन्ना कक्का सासुर चलला पढ़ि कऽ सासुरक नाम पर हँसैत-हँसैत लोट-पोट भऽ जाइत छी, ठीक ओकरे विपरीत, ख्यातिप्राप्त कवि कालीकान्त झा ‘बूच’ जीक ई मार्मिक रचना 'कन्यादान' अहाँक आँखि मे नोर आनि देत। जहिना माता-पिता छठि घाटे अरघ के बेर सन्तानक सुख लेल कातर भऽ जाइत छथि, तहिना ई कविता पिताक ओहि कातर भावकें शब्द दैत अछि जतय ओ अपन 'गौरी' सन बेटीकें 'शंकर' सन दामादक हाथ मे सौंपि रहल छथि। कन्यादान - सम्पूर्ण मैथिली कविता (मूल पाठ) आब बनवह विरान हय बेटी, चूब...
'मुन्ना कक्का सासुर चलला' - मैथिली साहित्यक एकटा बेजोड़ हास्य-व्यंग्य कविता सासुर जेबाक एहन खौक, जे पोखरि मे खसा देलक! मैथिल समाज मे "पाहुन" (दामाद) बनबाक जे आनन्द अछि, तकर वर्णन शब्द मे करब कठिन अछि। मुदा जखन सासुर जेबाक उत्सुकता पागलपनक स्तर पर पहुँचि जाय, तखन की होइत अछि? प्रसिद्ध कवि कालीकान्त झा ‘बूच’ जी अपन मैथिली कविता 'मुन्ना कक्का सासुर चलला' मे हास्य (Comedy) आ व्यंग्य (Satire) केर जे तड़का लगेने छथि, ओ पढ़ि कऽ अहाँ पेट पकड़ि कऽ हँसब। जहिना गम्भीर भाव मे मातृ गीत (Matri Geet) माए केर असीम महिमा गबैत अछि, ठीक ओकर विपरीत ई कविता हास्य रसक चरम पर अछि। दुःखक अन्हार जनि (Aanhar Janni) केँ चीरैत, ई कविता अहाँक ठोर पर मुस्कान लाबि दैत अछि, जेना कोनो अपना 'कनी हँसि केँ कहु' गबैत हो। आउ पढ़ी, मुन्ना कक्काक सासुर जेबाक महा-अभियान! मुन्ना कक्का सासुर चलला - सम्पूर्ण मैथिली कविता (मूल पाठ) कच्छी कऽसि-कऽसि तहिपर धोती रऽचि रऽचि कऽ। मुन्ना कक्का सासुर चलला...