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Ugna Re Mor Katay Gela: Vidyapati Ki Nachari (Hindi Arth Sahit)

मिथिला की पावन भूमि पर भक्ति की पराकाष्ठा का यदि कोई प्रमाण है, तो वह महाकवि विद्यापति और भगवान शिव (उगना) की कथा है। जब त्रिभुवन के स्वामी एक भक्त के प्रेम में बंधकर 'चाकर' (नौकर) बन गए, तो इतिहास रचा गया। यह वही ऐतिहासिक क्षण है जब रेगिस्तान में प्यासे महाकवि विद्यापति को 'उगना' बने भगवान शिव ने जल पिलाया। इसी घटना से उनका भेद खुला और कालांतर में ' उगना रे मोर कतय गेला ' नचारी की रचना हुई। आज हम विद्यापति की उस प्रसिद्ध नचारी (Nachari) "उगना रे मोर कतय गेला" का विश्लेषण करेंगे। यह रचना केवल एक Maithili Kavita नहीं, बल्कि एक भक्त का करुण विलाप है। साहित्य जगत में अक्सर यह बहस होती है कि विद्यापति भक्त कवि थे या शृंगारिक , परन्तु इस नचारी को पढ़कर उनकी निश्छल भक्ति का ही प्रमाण मिलता है। इस लेख में आप पढ़ेंगे: उगना महादेव की कथा मैथिली लिरिक्स (Devanagari) Hinglish Lyrics Video Song हिंदी भावार्थ उगना और विद्यापति: भक्ति की एक अमर कथा किंवदंतियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, विद्यापति की शिव भक्ति से प...

भारत माता: बाबा नागार्जुन 'यात्री' की प्रसिद्ध मैथिलि कविता | Bharat Mata Poem by Nagarjun (Yatri)

भारत माता: बाबा नागार्जुन 'यात्री' की प्रसिद्ध मैथिलि कविता | Bharat Mata Poem by Nagarjun बाबा नागार्जुन (यात्री) की मैथिलि कविता  कियै टूटल जननि! धैर्यक सेतु? कानि रहलहुँ अछि, अरे! की हेतु? अहा! जागल आइ कटु-स्मृति कोन? जाहिसँ भै गेल व्याकुल मोन? विश्वभरिमे विदित नाम अहाँक! कान्तियो नयनाभिराम अहाँक! केहन उज्ज्वल मा! अहाँक अतीत भेलहुँ अछि पुनि कोन भयसँ भीत?   जलधि-वसने! हिम-किरीटिनि देवि! तव चरण-पंकज युगलकेँ सेवि, लोक कहबै अछि अरे! तिहुँ लोक! अहीं केँ चिन्ता, अहीकेँ शोक!! कहू जननी कियै नोर बहैछ छाड़ि रहलहुँ अछि कियै निःश्वास? कोन आकस्मिक विषादक हेतु भै रहल अछि मूँह एहन उदास?  - यात्री मैथिलि देशभक्ति कवितायेँ भारत माता पर मैथिलि देशभक्ति कविता कवि परिचय: बाबा नागार्जुन 'यात्री हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम कवि बाबा नागार्जुन का वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। मैथिली साहित्य में वे अपने उपनाम 'यात्री' से प्रसिद्ध हुए। उनका जन्म 1911 में बिहार के मधुबनी जिले के तरौनी गाँव में हुआ था। उन्हें "जनकवि" (जनता का कवि) के रूप में जाना जाता है क्यों...