मैथिली और हिंदी साहित्य के 'जनकवि' बाबा नागार्जुन (जिन्हें मैथिली में 'यात्री' जी के नाम से जाना जाता है) अपनी कविताओं में धरती की सौंधी महक और जन-जीवन का यथार्थ चित्रण करने के लिए प्रसिद्ध हैं。 आज हम उनकी प्रसिद्ध मैथिली कविता "साओन" (Saon) का आनंद लेंगे। जिस प्रकार हिंदी में उनकी कविता 'बादल को घिरते देखा है' प्रकृति का विराट रूप दिखाती है, वैसे ही 'साओन' मिथिलांचल में वर्षा ऋतु के सौंदर्य, प्रेम और लोक-संस्कृति का एक सजीव चित्र प्रस्तुत करती है। आइये, इस कविता के बोल (Lyrics) और इसके विस्तृत भावार्थ (Saon Meaning) को समझते हैं। "झूलो झूलथु नन्दकिशोर..." — The divine romance of Radha-Krishna amidst the Sawan rain. साओन (Saon Lyrics) कवि: वैद्यनाथ मिश्रा "यात्री" (Nagarjun) परतीक कोँढ़ - करेज जुड़ाएल बाध - बोन हरिअर भऽ गेल प्रकृत...