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मैथिली साहित्य: गौरवशाली अतीत, ठहरल वर्तमान आ भविष्यक संकट — एक विश्लेषण

Home » Maithili Sahitya » Crisis Analysis मैथिली साहित्य आ भाषाक स्थिति पर बात करब आइ कनी जोखिम भरा अछि। हम सब 'जय मैथिली' केर नारा तऽ खूब लगाबैत छी, मुदा की हम कखनो ओहि मौन संकट के महसूस केने छी जे हमर भाषा के भीतर सँ खोखला कऽ रहल अछि? मिथिलाक चित्रकला विश्व प्रसिद्ध भऽ रहल अछि— मिथिला पेंटिंगक इतिहास एतय गवाह अछि—मुदा साहित्यक पाठक वर्ग लुप्त प्रायः अछि। पीढ़ीगत विच्छेद: जखन बुजुर्ग पोथी पढ़ैत छथि, मुदा नई पीढ़ी 'भाषिक लज्जा' केर कारण अपन जड़ि सँ कटि रहल अछि। ई आलेख कोनो विलाप नहि, बल्कि एकटा 'चेतावनी' (Warning) अछि। अतीत के गौरवगान सँ बाहर निकलि कऽ, आइ हम मैथिली साहित्य, समाज आ भविष्यक कठोर यथार्थ पर बात करब। भाग 1: मैथिली साहित्य: गौरवशाली अतीत सँ ठहरल वर्तमान धरि मैथिली साहित्य एखन जँ संकट में अछि, तऽ ई मानि लेल जाय कि ई संकट अचानक उत्पन्न नहि भेल अछि। ई संकट पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमा होइ...