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करूणा भरल ई गीत हम्मर | Karuna Bharal Ee Geet Hammar (Maithili Lyrics & Meaning)

मैथिली साहित्य में करुणा और वेदना (Pain and Compassion) का स्थान अत्यंत गहरा है। जहाँ विद्यापति की नचारी में भक्ति की करुणा है, वहीं आधुनिक मैथिली कविता में टूटे हुए सपनों की टीस है। आज हम मैथिली कवि धीरेन्द्र (Dhirendra) की एक अत्यंत भावुक रचना "करूणा भरल ई गीत हम्मर" (Karuna Bharal Ee Geet Hammar) का पाठ और विश्लेषण करेंगे। यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे हृदय की पुकार है जिसने 'नंदन वन' (स्वर्ग) बसाने का सपना देखा था, लेकिन उसे नसीब हुए सिर्फ 'अंगार' (Embers)। आइये, इस रचना की गहराइयों में उतरें। "अश्रुटा उपहार..." - A song of compassion and loss. करूणा भरल ई गीत हम्मर कवि: धीरेन्द्र करूणा भरल ई गीत हम्मर, प्राणकेर झंकार। दए रहल छी हम जगतकें अश्रुटा उपहार। सोचने छलहुँ दुनियाँ बसाबी, सोचने छलहुँ नन्दन लगाबी, स्वप्न छल जे बस उतारी स्वर्ग हम साकार। ह...