मिथिला की मिट्टी में ऐसा क्या है जो इसे इतना पावन बनाता है? मिथिला केवल एक भौगोलिक क्षेत्र या नक्शे पर खींची गई लकीर नहीं है; यह एक जीवंत, धड़कती हुई भावना है । जब भी प्राचीन मिथिला के आम के बगीचों से हवा गुजरती है, तो वह इस मिट्टी की सबसे लाडली बेटी— माता जानकी (सीता) का नाम गुनगुनाती है। मैथिली साहित्य और संगीत का संसार भक्ति से भरा पड़ा है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसी रचना सामने आती है जो केवल कानों को नहीं सुनती, बल्कि सीधे आत्मा में उतर जाती है। "मिथिला के धिया सिया" (Mithila Ke Dhiya Siya) एक ऐसी ही अमर और अलौकिक रचना है। सुरीले गायक विकाश झा की आवाज़ और मैथिली पुत्र प्रदीप की शानदार लेखनी से सजा यह गीत एक साधारण भजन की सीमाओं को लांघ जाता है। यह मिथिला की भौगोलिक भव्यता, आध्यात्मिक दिव्यता, और शिव-पार्वती तथा सीता-राम के उन शाश्वत संबंधों की एक काव्यात्मक यात्रा है जो हमारी जड़ों में बसे हैं। आइए, इस दिव्य गीत के बोल, इसके गहरे अर्थ और मिथिला के हृदय को करीब से महसूस करें। माता जानकी का दिव्य स्वरूप—मिथिला की वह लाडली बेटी...