Baba Baidyanath Hum Aayal Chhi Bhikhariya – Maithili Shiv Nachari Lyrics & Meaning
मिथिलांचल की पावन भूमि पर भगवान शिव की आराधना केवल पूजा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संवाद (Emotional Dialogue) है। जब भी कोई भक्त अपनी दीनता, विवशता और सांसारिक कष्टों को लेकर महादेव के द्वार पर पहुँचता है, तो उसके कंठ से स्वतः ही फूट पड़ता है— "बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया।"
यह केवल एक लोकगीत या मैथिली नचारी नहीं है, बल्कि यह हर उस श्रद्धालु की पुकार है जो देवघर (Baidyanath Dham) के कामना लिंग के समक्ष नतमस्तक है। ठीक वैसे ही जैसे सुदामा श्री कृष्ण के द्वार पर अपनी दीनता लेकर गए थे, वैसे ही यहाँ भक्त शिव के द्वार पर खड़ा है।
महाकवि विद्यापति ने जिस नचारी विधा को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कवि काशीनाथ ने इसमें भक्त और भगवान के बीच के अटूट रिश्ते को पिरोया है। चाहे शारदा सिन्हा की मर्मस्पर्शी आवाज़ हो या युवा मैथिली ठाकुर का नया अंदाज़, यह गीत हर सावन में मिथिला और संपूर्ण भारत में गुंजायमान रहता है।
🎧 नचारी सुनें (Listen to the Bhajan)
यह भजन सावन और श्रावणी मेले में विशेष रूप से गाया जाता है।
बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया - लिरिक्स
बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया,
अहाँ के दुअरिया ना।
बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया,
अहाँ के दुअरिया ना॥
अइलों बड़-बड़ आस लगायल, होहियो हमरा पर सहाय।
एक बेरी फेरी दियौ, हो बाबा एक बेरी फेरी दियौ...
गरीब पर नजरिया, अहाँ के दुअरिया ना॥
(बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी...)
हम बाघम्बर झारी ओछायब, डोरी डमरू के सरियाएब।
कखनो झारी बुहराब, हो कखनो झारी बुहराब...
बसहा के डगरिया, अहाँ के दुअरिया ना॥
(बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी...)
कार्तिक गणपति गोद खेलायब, कोरा कान्हा पे चढ़ायब।
गौरा-पारबती से, हे बाबा गौरा-पारबती से...
करबै अरजिया, अहाँ के दुअरिया ना॥
(बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी...)
हम गंगाजल भरी-भरी लायब, बाबा बैजू के चढ़ायब।
बेलपत चन्दन चढ़ायब, बेलपत चन्दन चढ़ायब...
फूल केसरिया, अहाँ के दुअरिया ना॥
(बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी...)
कतेक अधम के अहाँ तारलों, कतेक पतित के उबारलों।
काशीनाथ नचारी गवैया, काशीनाथ नचारी गवैया...
बाबा एक बेर फेरी दियौ हमरो पर नजरिया, अहाँ के दुअरिया ना॥
बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया, अहाँ के दुअरिया ना।
Hinglish Lyrics (Baba Baidyanath Hum Aayal Chhi)
Baba Baidyanath hum aayal chhi bhikhariya, aahan ke duariya na.
Baba Baidyanath hum aayal chhi bhikhariya, aahan ke duariya na.
Ailon bad-bad aas lagayal, hohiyo hamra par sahay.
Ek beri pheri diyou, ho Baba ek beri pheri diyou...
Garib par najariya, aahan ke duariya na.
(Baba Baidyanath hum aayal chhi...)
Hum baghambar jhaari ochhayab, dori damru ke sariyayab.
Kakhno jhaari buhraab, ho kakhno jhaari buhraab...
Basaha ke dagariya, aahan ke duariya na.
(Baba Baidyanath hum aayal chhi...)
Kartik Ganpati god khelayab, kora Kanha pe chadhayab.
Goura-Parbati se, he Baba Goura-Parbati se...
Karbai arajiya, aahan ke duariya na.
(Baba Baidyanath hum aayal chhi...)
Hum Gangajal bhari-bhari layab, Baba Baiju ke chadhayab.
Belpat chandan chadhayab, belpat chandan chadhayab...
Phool kesariya, aahan ke duariya na.
(Baba Baidyanath hum aayal chhi...)
Katek adham ke aahan taarlon, katek patit ke ubaarlon.
Kashinath nachari gavaiya, Kashinath nachari gavaiya...
Baba ek ber pheri diyou hamro par najariya, aahan ke duariya na.
हिंदी भावार्थ (Meaning in Hindi)
इस नचारी में भक्त अपनी दीनता स्वीकार करते हुए कहता है:
- याचना: "हे बाबा! मैं आपके द्वार पर एक भिखारी बनकर आया हूँ। मेरी बहुत बड़ी आशा है, मुझ पर कृपा कीजिये और एक बार अपनी दयालु दृष्टि इस गरीब पर डालिये।"
- सेवा भाव: भक्त कहता है कि वह महादेव की सेवा में बाघम्बर (बाघ की खाल) को झाड़कर बिछाएगा, डमरू की डोरी को सहेजेगा और नंदी (बसहा) के रास्ते की सफाई करेगा।
- समर्पण: वह माता पार्वती से सिफारिश (अरजी) करने की बात करता है और कहता है कि वह सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर लाएगा, बेलपत्र, चन्दन और केसरिया फूल अर्पित करेगा।
- विश्वास: अंत में कवि काशीनाथ कहते हैं कि हे प्रभु, आपने अनेकों पापियों का उद्धार किया है, अब मुझ पर भी एक बार अपनी कृपा दृष्टि फेर दीजिये।
मैथिली साहित्य की अन्य धरोहरें
मैथिली साहित्य में भक्ति और श्रृंगार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। जहाँ एक ओर भक्त शिव से हठ करता है, वहीं दूसरी ओर दुल्हिन धीरे-धीरे चल्यो (विवाह गीत) जैसे गीतों में विदाई की कोमलता झलकती है।
भक्ति की यह 'जिद' हमें आधुनिक काल के कवि बाबा नागार्जुन की रचनाओं में भी दिखती है, जिन्होंने जन-मन की व्यथा को उसी अधिकार से रखा। अगर आप विद्यापति की परंपरा को और गहरायी से समझना चाहते हैं, तो पहिलें बदरी कुछ पुन नवरंग का भावार्थ अवश्य पढ़ें।
इसके अलावा, राष्ट्रप्रेम की भावना के लिए भारत माता और शिक्षा के महत्व पर विद्या तीसर नयन अछि जैसी कविताएँ अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि आप श्री कृष्ण की भक्ति में रुचि रखते हैं, तो कन्हैया याद है कुछ भी हमारी भजन भी अवश्य देखें।
इस नचारी की ऐतिहासिकता और शिव भक्ति परंपरा के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इन प्रतिष्ठित स्रोतों को देख सकते हैं:
निष्कर्ष (Conclusion)
"बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया" मात्र शब्दों का समूह नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण की पराकाष्ठा है। यह नचारी हमें सिखाती है कि ईश्वर के समक्ष हम सभी याचक हैं। हमें उम्मीद है कि Sahityashala का यह प्रयास आपको पसंद आया होगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस नचारी के रचयिता कौन हैं?
पारंपरिक रूप से इस नचारी के रचयिता कवि काशीनाथ माने जाते हैं, जिनका नाम गीत की अंतिम पंक्तियों में आता है।
'नचारी' का क्या अर्थ है?
नचारी मैथिली लोकगीत की वह विधा है जिसे महाकवि विद्यापति ने साहित्यिक प्रतिष्ठा दिलाई। इसमें भक्त भगवान शिव के समक्ष अपनी लाचारी और विवशता प्रकट करते हुए उनसे कृपा की भीख मांगता है।
'बसहा' का अर्थ क्या है?
मैथिली और अंगिका क्षेत्र में 'बसहा' भगवान शिव के वाहन नंदी बैल को कहा जाता है।
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