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प्रेयसी - Preyasi | Vaidyanath Mishra "Yatri" Maithili Poems (Lyrics & Meaning)

मैथिली साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर और जनकवि वैद्यनाथ मिश्रा 'यात्री' (जिन्हें हिंदी साहित्य में बाबा नागार्जुन के नाम से जाना जाता है) की कविताएँ जन-जन की भावनाओं का दर्पण हैं। उनकी मैथिली रचनाओं में 'यात्री' उपनाम से लिखी गई कविताएँ विशेष स्थान रखती हैं। आज हम उनकी एक अत्यंत भावपूर्ण कविता "प्रेयसी" (Preyasi) का रसास्वादन करेंगे। यह कविता दीर्घकालीन वियोग के बाद प्रेमी-प्रेमिका के पुनर्मिलन और प्रेम की निश्छलता को दर्शाती है। "एक आँखि कनैत अछि जग एक आँखि हँसैत!" — The profound emotion of reunion. प्रेयसी (Preyasi) कवि: वैद्यनाथ मिश्रा "यात्री" ठाढ़ी भेली आबि तों तैखन कहाँसँ हे हमर हीरा, हमर मोती, हमर हे सोन ! चिन्तनाक अथाह जलमे लगौलक डुबकी - जखन ई मोन ! उठाओल चिरकाल सँ निहुँड़ल अपन ई माथ कान्हपर जैखन देलह तों ह...