मैथिली साहित्य के आधुनिक स्तंभ और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता गंगेश गुंजन (Gangesh Gunjan) अपनी प्रखर लेखनी और मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताएँ केवल भावुकता का प्रदर्शन नहीं करतीं, बल्कि वे हमारे समय की 'राजनीतिक विद्रूपता' (Political Absurdity) पर एक सर्जिकल स्ट्राइक की तरह होती हैं। आज हम उनकी बहुचर्चित कविता "इजोत लए" (Ejot Lay - प्रकाश के लिए) का गंभीर विश्लेषण करेंगे। यह कविता लोकतंत्र के गिरते स्तर, मीडिया के भ्रमजाल (Media-Maya), और 'गांधी बनाम गोधरा' के द्वंद्व को रेखांकित करती है। जिस तरह बाबा नागार्जुन ने व्यवस्था के खिलाफ हुंकार भरी थी, गंगेश गुंजन जी यहाँ व्यवस्था की 'अंधेरी रूह' का पोस्टमार्टम करते हैं। "भुक-भुक इजोत उजागर अछि..." — A flicker of truth in the colorful darkness. इजोत लए (Ejot Lay) कवि: गंगेश गुंजन अन्हरिए ...