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मैथिली साहित्यक संकट: नारा सँ नहि, संरचनात्मक समाधान सँ (एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट)

Home » Solutions » Strategic Blueprint मैथिली साहित्य पर जे संकट आयल अछि, ओ केवल “पाठक कम भऽ गेल छथि” जेकाँ सतही समस्या नहि अछि। हम अपन पूर्व लेख (संकट विश्लेषण) में विस्तार सँ चर्चा केने रही जे कोना ई एकटा संरचनात्मक विफलता (Structural Failure) अछि। लेखक समाज सँ कटि गेल छथि, पाठक साहित्य सँ, आ संस्था जमीन सँ। एहि कारणेँ समाधान सेहो भावुक नहि, संस्थागत, सामाजिक आ आर्थिक स्तर पर होय के चाही। ई लेख ककर लेल अछि? अभिभावक: जे बच्चा कें मैथिली सिखबैत हिचकिचा रहल छथि। लेखक: जे पाठक कें अभाव सँ निराश छथि। संस्था: जे मैथिलीक भविष्य कें लऽ कऽ चिंतित छथि। भाग 1: जे उपाय लोकप्रिय अछि, मुदा गलत अछि पहिने ओ उपाय सभक आलोचना जरूरी अछि जे सुनय में नीक लगैत अछि, मुदा व्यवहार में निष्फल सिद्ध भेल अछि। अतीत मोह: केवल प्राचीन पोथी आ नारा सँ वर्तमानक ताला नहि खुल्त। हमरा व्यवहारिक चाभी चाही। ...