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मार्च, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जो रे चान जो ई सनेस नेने जो Lyrics & Meaning - हरिनाथ झा मैथिली गीत

"जो रे चान जो ई सनेस नेने जो" (Jo Re Chan Jo E Sanes Nene Jo) हरिनाथ झा द्वारा गाओल एक अत्यंत मार्मिक आ लोकप्रिय मैथिली विरह गीत अछि। जँ अहाँ Jo Re Chan Jo lyrics in Maithili , Hari Nath Jha Maithili song lyrics , अथवा full Maithili lyrics with meaning खोजि रहल छी, तँ एहि पृष्ठ पर अहाँकेँ शुद्ध बोल, शब्दार्थ, आ एहि गीतक गहीर साहित्यिक विश्लेषण भेटत। ई गीत दाम्पत्य जीवनक नोकझोंक आ प्रकृति सँ संवादक एकटा अनुपम उदाहरण थिक। "धिया रहति कतेक दिन बाबाक अंगना" — मैथिली लोकगीतक सभ सँ मार्मिक पंक्तिमे सँ एक मानल जाइ अछि, जे विरह आ सामाजिक यथार्थ केँ जीवंत करैत अछि। मैथिली विरह गीत "जो रे चान जो" - चानक माध्यम सँ अपन पिया लग सनेस पठेबाक मार्मिक दृश्य। 🎵 गीतक विवरण (Song Credits) 🎤 गायक (Singer): हरिनाथ झा (Hari Nath Jha) 🎼 संगीत (Music): हरिनाथ झा 🎬 फिल्म/एल्बम (Album): गजल (Gazal) ✍️ गीतकार (...

मैथिली आकांक्षा मंचक सशुल्क स्वयंसेवा २०२६ | आवेदन करू

मैथिली आकांक्षा मंच द्वारा आगामी ६ मासक सशुल्क स्वयंसेवा कार्यक्रमक लेल आधिकारिक भर्ती सूचना। विश्वविद्यालय परिसरसभमे मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक संरक्षण तथा संवर्धन लेल मैथिली आकांक्षा मंच (Maithili Aakansha Manch) एकटा नव आ अत्यंत महत्वपूर्ण पहल लऽ कए आएल अछि। वर्तमान समयमे जतय हमरा सभ मैथिली साहित्यक संकट आ भविष्य पर विचार-विमर्श कए रहल छी, ओतय ई मंच युवा पीढ़ी केँ संगठित करबाक लेल एकटा संरचनात्मक समाधान (Structural Solution) बनि कऽ सोझाँ आएल अछि। जँ अहाँ विद्यार्थी छी आ अपन मातृभाषा लेल किछु करबाक जज्बा रखैत छी, तँ ई सशुल्क स्वयंसेवा (Paid Volunteership) अहाँक लेल एकटा बेहतरीन अवसर थिक। 📢 मैथिली आकांक्षा मंच: ६ मासक सशुल्क स्वयंसेवा (Paid Volunteership) मैथिली आकांक्षा मंच विश्वविद्यालयीय परिसरसभमे मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृति केर संवर्धन आ प्रसार हेतु सक्रिय एकटा प्रमुख संगठन अछि। हमसभ अपन आगामी ६ मासक कार्यक्रमसभ लेल उत्साही आ प्रतिबद्ध स्वयंसेवकक खोज मे छी। 💼 आवश्यक पद (A...

नब नचारी (Nab Nachari) - बाबा नागार्जुन "यात्री" | Maithili Poem

नब नचारी कविता – बाबा नागार्जुन "यात्री" की प्रसिद्ध मैथिली रचना मैथिली साहित्य के जनकवि वैद्यनाथ मिश्र "यात्री" की प्रखर व्यंग्य कविता यहाँ प्रस्तुत है मैथिली साहित्य के महान जनकवि बाबा नागार्जुन "यात्री" जी की कालजयी और सामाजिक व्यंग्य से भरी कविता 'नब नचारी' (Nab Nachari) । यह कविता सीधे तौर पर बाबा बैद्यनाथ (भगवान शिव) को संबोधित करते हुए रची गई है, जो समाज में व्याप्त घोर गरीबी, भ्रष्टाचार और व्यवस्था की विफलता पर एक तीक्ष्ण प्रहार करती है। 'यात्री' जी की यह प्रसिद्ध मैथिली कविता (Maithili Poem) अपने बेबाक और विद्रोही अंदाज़ के लिए जानी जाती है। अगड़ाही लागउ, वज्र खसउ, बरू किच्छु होउक... नहि नबतै तोरा खातिर किन्नहु हमर माथ ! पाथर भेलाह तों सरिपहुँ बाबा बैदनाथ ! बेत्रेक अन्न भ’ रहल आँट नेना-भुटका दुबरैल आंगुरें कल्लर सभ ...