सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Sitaram Jha Ki Kavita लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्वदेशमहिमा - Swadeshmahima | Maithili Patriotic Poem by Sitaram Jha | Meaning & Analysis

मैथिली साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र कविवर सीताराम झा की लेखनी ने न केवल ज्योतिष और व्याकरण को समृद्ध किया, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को भी जगाया। उनकी प्रसिद्ध कविता "स्वदेशमहिमा" (Swadeshmahima) देशभक्ति का एक ऐसा मंत्र है जो हमें अपनी मिट्टी से जोड़ता है। जिस प्रकार हम गणतंत्र दिवस पर हिंदी कविताएँ पढ़कर गर्व महसूस करते हैं, उसी प्रकार 'स्वदेशमहिमा' हर मैथिल के हृदय में स्वाभिमान भर देती है। इस कविता में कवि ने सिद्ध किया है कि अपनी मातृभूमि का सुख, स्वर्ग और मोक्ष (अपवर्ग) से भी बढ़कर है। आइये, इस कालजयी रचना का पाठ करें और इसका अर्थ समझें। "नै बिसरै’ अछि कीर तथापि... निज नीड़" — Even in a golden cage, the soul longs for its own home. स्वदेशमहिमा (Swadeshmahima) कवि: सीताराम झा 1. उत्कर्ष (Comparison) सम्प्रति पण्डितवृन्दक हो गणना, जहि रूप गणेशक सम्मुख, अंडिक ...