विद्यापति के नचारी Lyrics : शिव नचारी (एत जप-तप) कल्पना कीजिये उस माँ की पीड़ा की, जिसने अपनी कोमल पुत्री के लिए राजकुमार सोचा था, पर द्वार पर भस्म रमाये, सर्पों की माला पहने एक जोगी आ खड़ा हुआ। यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि लोक-व्यवहार और अध्यात्म का द्वंद्व है। 'मैथिल कोकिल' विद्यापति की यह प्रसिद्ध 'शिव नचारी' उसी वात्सल्य और चिंता का मर्मस्पर्शी चित्रण है। आइये, इस रचना का मूल पाठ, अंग्रेजी लिप्यंतरण (Lyrics) और सरल हिंदी भावार्थ पढ़ते हैं। 📥 Download Shiv Nachari Lyrics PDF The Ascetic Shiva: A Mother's Worry शिव नचारी (Maithili Lyrics) एत जप-तप हम की लागि कयलहु, कथि लय कयल नित दान। हमर ...