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जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे लिरिक्स | Jehne Kishori Mori Lyrics & Meaning

अलौकिक विवाह: एक गीत के माध्यम से मिथिला की आत्मा का दर्शन

क्या आपने कभी कोई ऐसी धुन सुनी है जो महज़ एक गीत न होकर एक समय-यान (Time Machine) की तरह महसूस होती हो? मिथिला के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आँगनों में, पारंपरिक विवाह गीत ठीक यही जादुई प्रभाव रखते हैं।

मैथिली लोक संगीत के विशाल सागर में, "जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे" काव्यात्मक भक्ति और वैवाहिक उत्सव के सर्वोच्च शिखर के रूप में स्थापित है। यह केवल एक गीत नहीं है; यह एक भावनात्मक धरोहर है जो मैथिल महिलाओं की पीढ़ियों द्वारा सहेजी गई है।

यह अद्भुत रचना माता सीता (किशोरी) और प्रभु श्री राम (किशोर) के अलौकिक मिलन का एक अत्यंत सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है। हमारी साहित्यशाला (Sahityashala) की जड़ों से जुड़ा यह गीत हर मैथिली विवाह की धड़कन है, जिसे शारदा सिन्हा, स्नेह लता और मैथिली ठाकुर जैसी गायिकाओं ने अमर कर दिया है। आइए इस कालजयी रचना के बोल और इसके गहरे साहित्यिक भावार्थ में गोता लगाएँ।

Lord Ram and Mata Sita exchanging garlands during their traditional divine wedding in a decorated Mithila courtyard, depicting the joyous Maithili Vivah Geet Jehne Kishori Mori
The breathtaking, divine union of Lord Ram and Mata Sita—the perfect "match made in heaven" celebrated in the timeless Maithili folk song Jehne Kishori Mori Tehne Kishore Hey.

जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे लिरिक्स (Maithili)

जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे,
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे।

श्यामल बदन घुमरल घटा घनघोर हे,
एमहर किशोरी मोरी पूर्णिमा इजूर हे।
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे...

जिनका लय जोगी मुनि कइलनी जोग हे,
से मोरा पाहून श्री राम चितचोर हे।
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे...

सरसो के कली सिया ज्योति बेजोड़ हे,
तिशी के फूल रंग नवल किशोर हे।
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे...

किनका के पापी देहि धन्य भाग्य मोर हे,
सरस सनेही पाहून रेशम के डोर हे।
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे...

जेहने किशोरी मोरी तेहने किशोर हे,
बिधना लगावल जोड़ी केहन बेजोड़ हे।

*सांस्कृतिक नोट: लोकगीत की मौखिक परंपरा (Oral Tradition) के कारण कुछ स्थानों पर "किनका के पापी देहि" को "किनका के पापी देह" के रूप में भी गाया जाता है।

Jehne Kishori Mori Tehne Kishore Hey Lyrics in English

Jehne kishori mori tehne kishore hey,
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey.

Shyamal badan ghumral ghata ghanghor hey,
Emhar kishori mori purnima ijoor hey.
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey...

Jinka lay jogi muni kailani jog hey,
Se mora paahun Shri Ram chitchor hey.
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey...

Sarso ke kali Siya jyoti bejod hey,
Tishi ke phool rang naval kishore hey.
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey...

Kinka ke paapi dehi dhanya bhagya mor hey,
Saras sanehi paahun resham ke dor hey.
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey...

Jehne kishori mori tehne kishore hey,
Bidhna lagaval jodi kehan bejod hey.

“जेहने किशोरी मोरी” गीत का सांस्कृतिक महत्व

मिथिलांचल की संस्कृति में यह गीत केवल एक वैवाहिक रस्म नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अधिकार है। पूरे भारतवर्ष में जहां श्री राम की पूजा एक सर्वोच्च भगवान या राजा के रूप में की जाती है, वहीं मिथिला उन्हें अपना 'पाहुन' (दामाद) मानती है। यह अपनत्व भरा अधिकार (Familial Affection) मैथिली भक्ति परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता है।

इस गीत को गाते हुए मिथिलावासी इस बात का असीम गर्व महसूस करते हैं कि जिन परमेश्वर के दर्शन हेतु जोगी-मुनि जन्म-जन्मांतर तक तपस्या करते हैं (जिनका लय जोगी मुनि कइलनी जोग हे), वे उनके आँगन में एक साधारण दूल्हे के रूप में पधारे हैं। भगवान को परिवार का हिस्सा बना लेना, ठीक वैसे ही है जैसे चन्द्रमुखी सन गौरी में शिव को घर का जोगी माना गया है या बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी में शिव के साथ आत्मीय याचना की गई है।

साहित्यिक भावार्थ एवं विश्लेषण (Literary Meaning)

इस लोकगीत की गहराई को समझने के लिए इसे पारंपरिक मैथिली काव्य की दृष्टि से देखना होगा। जैसा कि हमने महाकवि विद्यापति की जीवनी में देखा है, इन लोक रचनाओं के अज्ञात रचनाकारों को दृश्य-रूपकों (Visual Metaphors) में महारत हासिल थी।

Surreal fantasy art visualizing Maithili song lyrics, showing Lord Ram's silhouette in dark monsoon clouds and Mata Sita represented by a radiant full moon and golden lotus
A visual representation of the song's profound poetry: contrasting Lord Ram's majestic, dark monsoon-cloud complexion (ghata ghanghor) with Mata Sita's soothing, full-moon radiance (purnima ijoor).
  • प्रकाश और अंधकार का अद्भुत कंट्रास्ट:
    "श्यामल बदन घुमरल घटा घनघोर हे, एमहर किशोरी मोरी पूर्णिमा इजूर हे" — प्रभु श्री राम के श्यामल और आकर्षक वर्ण की तुलना घने, सुंदर मानसूनी बादलों से की गई है जो जीवनदायी वर्षा लाते हैं। इसके एकदम विपरीत, माता सीता की आभा की तुलना पूर्णिमा के चाँद (इजूर) की शीतलता से की गई है। यह विरोधाभास मैथिली रोमांटिसिज्म (Shringar Rasa) का एक प्रमुख अंग है, जिसकी झलक हमें पिया मोर बालक जैसी रचनाओं में भी मिलती है।
  • पुष्पों का मनमोहक रूपक:
    "सरसो के कली सिया ज्योति बेजोड़ हे, तिशी के फूल रंग नवल किशोर हे" — सीता जी की उपमा सरसों की खिली हुई कली से की गई है जो सुनहरी चमक और समृद्धि का प्रतीक है। वहीं, राम जी की तुलना तीसी (Flax) के गहरे नीले/बैंगनी फूल से की गई है, जो गहराई, शांति और राजसी गरिमा को दर्शाता है।

सुनें और आनंद लें (Watch & Listen)

Experience the emotional resonance of Jehne Kishori Mori through these timeless and popular renditions perfectly capturing the soul of a Maithili wedding.

विरासत का संरक्षण

जेहने किशोरी मोरी जैसे गीतों का संरक्षण केवल संगीत को बचाना नहीं है; यह हमारी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का प्रयास है। जैसा कि हमने मैथिली साहित्य संरचनात्मक समाधान (Roadmap) में स्पष्ट किया है, नई पीढ़ी के लिए इन लोकगीतों का डिजिटल लिप्यांतरण और विश्लेषण ही वह एकमात्र उपाय है जिससे विद्यापति और अज्ञात लोक-कवियों की विरासत जीवंत रह सकती है। चाहे आप के पतिया लय जाएत रे का विरह गा रहे हों या विवाह के उल्लास गीत, आप अपनी कला से मिथिला की आत्मा को धड़कने दे रहे हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. "जेहने किशोरी मोरी" गीत के मूल गायक कौन हैं?

यह एक पारंपरिक मैथिली लोकगीत है जो मौखिक परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हुआ है, इसलिए इसका कोई एक मूल गायक नहीं है। हालाँकि, Jehne Kishori Mori Lyrics को शारदा सिन्हा, स्नेह लता और हाल ही में मैथिली ठाकुर जैसी दिग्गज गायिकाओं ने इंटरनेट पर विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया है।

2. "बिधना लगावल जोड़ी" का क्या अर्थ है?

"बिधना" का अर्थ विधाता या ब्रह्मा (Destiny/Creator) से है। इस पंक्ति का अर्थ है विधाता द्वारा बनाई गई जोड़ी, जो दर्शाता है कि राम और सीता का मिलन स्वर्ग में तय किया गया एक आदर्श मिलन है।

3. यह गीत विवाह की किस विशिष्ट रस्म के दौरान गाया जाता है?

यह गीत मुख्य रूप से 'विवाह गीत' या 'परिछन गीत' की श्रेणी में आता है। इसे आमतौर पर तब गाया जाता है जब दूल्हा दुल्हन के आँगन (मंडप) में आता है और घर की महिलाओं द्वारा उसका पहली बार स्वागत और दर्शन किया जाता है।

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