मैथिली साहित्य में करुणा और वेदना (Pain and Compassion) का स्थान अत्यंत गहरा है। जहाँ विद्यापति की नचारी में भक्ति की करुणा है, वहीं आधुनिक मैथिली कविता में टूटे हुए सपनों की टीस है।
आज हम मैथिली कवि धीरेन्द्र (Dhirendra) की एक अत्यंत भावुक रचना "करूणा भरल ई गीत हम्मर" (Karuna Bharal Ee Geet Hammar) का पाठ और विश्लेषण करेंगे। यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे हृदय की पुकार है जिसने 'नंदन वन' (स्वर्ग) बसाने का सपना देखा था, लेकिन उसे नसीब हुए सिर्फ 'अंगार' (Embers)। आइये, इस रचना की गहराइयों में उतरें।
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| "अश्रुटा उपहार..." - A song of compassion and loss. |
करूणा भरल ई गीत हम्मर
कवि: धीरेन्द्र
करूणा भरल ई गीत हम्मर,
प्राणकेर झंकार।
दए रहल छी हम जगतकें
अश्रुटा उपहार।
सोचने छलहुँ दुनियाँ बसाबी,
सोचने छलहुँ नन्दन लगाबी,
स्वप्न छल जे बस उतारी
स्वर्ग हम साकार।
हेरा गेल सभ कल्पना अछि,
मेटा गेल सभ भावना अछि,
आइ नन्दन केर जगह पर
ठाढ़ बस झंखार।
प्यास छल, जे अमृत पीबी,
प्यास छल जे स्नेह पाबी,
धारणा छल जे बहाबी
खाली सुधाकेर धार।
लुप्त सभटा कल्पना अछि,
आइ सभटा जल्पना अछि,
हेरा गेल अछि आइ सभटा प्राणकेर मनुहार।
लक्ष्य छल एक सर खुनाबी,
पुलकेर बस जल मँगाबी,
प्रत्येक लहरिक ठोरमे हो
बस मधुर संचार।
दूर सभटा कल्पना अछि,
दूर सभटा भावना अछि,
अछि सलिल केर ठाम पर
बस लह-लह करइत अंगार।
सोचैत छी जे तोष कएली,
नोरसँ निज कोष भरि ली,
हमर जीवन बनओ खाली
अश्रु केर भंडार।
ध्वस्त सभटा कल्पना अछि,
बंचि गेल खाली वेदना अछि,
कए रहल छी एहीसँ हम
अश्रुकेर व्यापार।
करूणा भरल ई गीत हम्मर प्राणकेर झंकार।
Karuna Bharal Ee Geet Hammar (Hinglish Lyrics)
Karuna bharal ee geet hammar, Praan ker jhankaar.
Dae rahal chhi hum jagat ke, Ashruta upahaar.
Sochne chhalhun duniya basaabi, Sochne chhalhun Nandan lagaabi,
Swapn chhal je bas utaari, Swarg hum saakaar.
Hera gel sabh kalpana achhi, Meta gel sabh bhavna achhi,
Aaj Nandan ker jagah par, Thaad bas jhankhaar.
Pyaas chhal, je amrit peeibi, Pyaas chhal je sneh paabi,
Dhaarna chhal je bahaabi, Khaali sudha ker dhaar.
Door sabhta kalpana achhi, Door sabhta bhavna achhi,
Achhi salil ker thaam par, Bas lah-lah karait angaar.
Dhvast sabhta kalpana achhi, Banchi gel khaali vedna achhi,
Kae rahal chhi ehis se hum, Ashru ker vyapaar.
भावार्थ और विश्लेषण (Poem Analysis)
यह कविता मनुष्य के उन सपनों की कहानी है जो यथार्थ की आग में जलकर राख हो जाते हैं। कवि धीरेन्द्र ने यहाँ व्यक्तिगत पीड़ा को ब्रह्मांडीय स्तर पर व्यक्त किया है।
1. नंदन वन बनाम झंखार (The Contrast)
कवि की इच्छा थी कि वे इस दुनिया में 'नंदन वन' (इंद्र का बगीचा/स्वर्ग) बसाएं, जहाँ केवल खुशियाँ हों। लेकिन वास्तविकता यह है कि आज उस जगह पर केवल 'झंखार' (कांटेदार झाड़ियाँ और वीरानी) खड़ी है। यह पंक्ति यात्री जी की प्रकृति प्रेम वाली कविताओं के ठीक विपरीत, प्रकृति के उजड़ने का बिम्ब प्रस्तुत करती है।
2. अमृत और अंगार (Nectar vs Fire)
कवि के मन में प्यास थी कि वे अमृत पिएंगे और प्रेम (स्नेह) पाएंगे। उन्होंने सोचा था कि 'सुधा' (अमृत) की धारा बहेगी। लेकिन जीवन ने उन्हें क्या दिया? शीतल जल (सलिल) के स्थान पर 'लह-लह करइत अंगार' (दहकती हुई आग)। यह विरोधाभास जीवन की कठोर सच्चाई को बयां करता है।
3. अश्रु केर व्यापार (The Trade of Tears)
कविता की सबसे सशक्त पंक्ति अंत में आती है - "कए रहल छी एहीसँ हम, अश्रुकेर व्यापार।" जब इंसान के पास खुशियाँ नहीं बचतीं, तो वह अपने आँसुओं का ही सौदा करने लगता है। उसका दुख ही उसकी एकमात्र संपत्ति बन जाता है। यह भाव हमें उर्दू शायरी के उस दर्द की याद दिलाता है जहाँ 'शिकस्त-ए-दिल' (दिल का टूटना) ही कवि की पहचान बन जाती है।
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रचनात्मकता और करियर: यदि आप भी ऐसे भावों को शब्दों में पिरोते हैं, तो फ्रीलांस लेखन (Freelance Writing) में अपना भविष्य तलाश सकते हैं।
निष्कर्ष
'करूणा भरल ई गीत हम्मर' हमें सिखाती है कि जीवन में टूटना अंत नहीं है। कवि ने अपने टूटे हुए सपनों को गीतों में ढालकर उसे अमर कर दिया। साहित्यशाला पर ऐसी ही मर्मस्पर्शी रचनाओं के लिए बने रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'करूणा भरल ई गीत हम्मर' कविता का मुख्य भाव क्या है?
यह कविता टूटे हुए सपनों, जीवन की निराशा और भावनात्मक खालीपन (Emotional Void) को दर्शाती है।
'अश्रुकेर व्यापार' से कवि का क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है कि जब जीवन में खुशियाँ शेष नहीं रहतीं, तो व्यक्ति अपने दुख और आंसुओं को ही अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना लेता है।
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