सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

एत जप-तप हम की लागि कयलहु - विद्यापति नचारी (संपूर्ण व्याख्या)

क्या आपने कभी सोचा है कि जब जगत की जननी पार्वती के विवाह का प्रस्ताव लेकर महादेव उनके घर पहुँचे होंगे, तो उनकी माता मैना के मन पर क्या बीती होगी? महाकवि विद्यापति की यह कालजयी रचना 'एत जप-तप हम की लागि कयलहु' उसी क्षण की एक जीवंत तस्वीर है।

महाकवि विद्यापति ताड़पत्र पर मैथिली नचारी लिखते हुए
मैथिल कोकिल विद्यापति: शिव भक्ति में डूबे नचारियों की रचना करते हुए।

2026 के इस आधुनिक दौर में, जहाँ हम 'परफेक्ट लाइफ पार्टनर' की तलाश करते हैं, वहीं यह नचारी हमें याद दिलाती है कि शिव जैसा 'अमंगळ' दिखने वाला व्यक्ति ही वास्तव में 'कल्याण' का प्रतीक है। मिथिला की परंपरा में यह गीत मात्र एक भजन नहीं, बल्कि एक माँ के वियोग, चिंता और अंततः आत्म-बोध की यात्रा है।


एत जप-तप हम की लागि कयलहु - मूल पाठ (Lyrics)

एत जप-तप हम की लागि कयलहु,
कथि लय कयल नित दान।
हमर धिया के इहो वर होयताह,
आब नहिं रहत परान।

नहिं छनि हर कें माय-बाप,
नहिं छनि सोदर भाय।
मोर धिया जओं ससुर जयती,
बइसती ककरा लग जाय।

घास काटि लऔती बसहा च्रौरती,
कुटती भांग–धथूर।
एको पल गौरी बैसहु न पौती,
रहती ठाढि हजूर।

भनहि विद्यापति सुनु हे मनाइनि,
दिढ़ करू अपन गेआन।
तीन लोक केर एहो छथि ठाकुर
गौरा देवी जान।

महाकवि विद्यापति केवल एक कवि नहीं थे, वे एक युग के निर्माता थे। यदि आप उनके जीवन के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा लेख विद्यापति: मैथिली साहित्य के सूर्य अवश्य पढ़ें।

कविता का सरल भावार्थ (Meaning)

  • माँ का विलाप: माता मैना कहती हैं कि मैंने इतना जप-तप किसलिए किया था? क्या मेरी सुकोमल बेटी को ऐसा भस्मधारी वर मिलना था?
  • पारिवारिक चिंता: शिव अनाथ हैं, न उनके माता-पिता हैं न भाई। मैना को चिंता है कि ससुराल में उनकी बेटी का अपना कहने वाला कोई नहीं होगा।
  • विद्यापति का दर्शन: अंत में कवि समझाते हैं कि जिन्हें तुम निर्धन समझ रही हो, वे ही चराचर जगत के स्वामी हैं।

नचारी बनाम महेशवाणी

श्रेणी मुख्य विषय भाव
नचारी शिव की निर्धनता और औघड़ रूप भक्ति और करुण रस
नभ नचारी शिव की व्यापकता अध्यात्म

विद्यापति की इसी जन-संवेदना को आधुनिक काल में बाबा नागार्जुन ने आगे बढ़ाया। आप उनकी जीवनी और प्रसिद्ध रचना बादल को घिरते देखा है यहाँ पढ़ सकते हैं।

मधुबनी पेंटिंग में नचारी का दृश्य
नचारी का दृश्य: शिव के औघड़ रूप को देख व्याकुल माता मैना।

निष्कर्ष

2026 में जब हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में Sahityashala Maithili का यह प्रयास आपको अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए है। साहित्य के अन्य पहलुओं के लिए हमारे मुख्य ब्लॉग Sahityashala.in पर जाएँ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नागार्जुन की मैथिली कविता 'विलाप' (अर्थ सहित) | Vilap by Nagarjun

नागार्जुन की प्रसिद्ध मैथिली कविता: विलाप विलाप - Vilap बाबा नागार्जुन: मैथिली के 'यात्री' बाबा नागार्जुन (मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र) को हिंदी साहित्य में उनके प्रगतिशील और जनवादी लेखन के लिए जाना जाता है। 'सिंदूर तिलकित भाल' जैसी उनकी हिंदी कविताएँ जितनी प्रसिद्ध हैं, उतना ही गहरा उनका मैथिली साहित्य में 'यात्री' उपनाम से दिया गया योगदान है। मैथिली उनकी मातृभाषा थी और उनकी मैथिली कविताओं में ग्रामीण जीवन, सामाजिक कुरीतियों और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत चित्रण मिलता है। 'विलाप' कविता का परिचय नागार्जुन की 'विलाप' (Vilap) मैथिली साहित्य की एक अत्यंत मार्मिक और प्रसिद्ध कविता है। यह कविता, उनकी अन्य मैथिली कविताओं की तरह ही, सामाजिक यथार्थ पर गहरी चोट करती है। 'विलाप' का मुख्य विषय समाज की सबसे दर्दनाक कुरीतियों में से एक— बाल विवाह (Child Marriage) —और उसके फलस्वरूप मिलने वाले वैधव्य (Widowhood) की पीड़ा है। यह कविता एक ऐसी ही बाल विधवा की मनोदशा का सजीव चित्रण करती है। नान्हिटा छलौँ, दूध पिबैत रही राजा-रानीक कथा सुनैत रही घर-आँग...

Vidyapati Poems in Maithili & Hindi | विद्यापति की कविता | शिव नचारी Lyrics

क्या आप ' मैथिल कवि कोकिल ' विद्यापति की प्रसिद्ध मैथिली कविताएँ खोज रहे हैं? इस लेख में, हम उनकी सबसे प्रशंसित रचनाओं में से एक, एक ' शिव नचारी ' (Shiv Nachari), को उसके मूल गीतों (lyrics) के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। इस मैथिली कविता के पीछे के गहरे भाव को आसानी से समझने के लिए, हम इसका सरल हिन्दी भावार्थ (Hindi Meaning) भी प्रदान कर रहे हैं। शिव नचारी एत जप-तप हम की लागि कयलहु, कथि लय कयल नित दान। हमर धिया के इहो वर होयताह, आब नहिं रहत परान। नहिं छनि हर कें माय-बाप, नहिं छनि सोदर भाय। मोर धिया जओं ससुर जयती, बइसती ककरा लग जाय। घास काटि लऔती बसहा च्रौरती, कुटती भांग–धथूर। एको पल गौरी बैसहु न पौती, रहती ठाढि हजूर। भनहि विद्यापति सुनु हे मनाइनि, दिढ़ करू अपन गेआन। तीन लोक केर एहो छथि ठाकुर गौरा देवी जान। Vidyapati Poems in Maithili & Hindi कवि परिचय: विद्यापति कवि विद्यापति (जन्म लगभग 1352-1448) एक महान मैथिली कवि और संस्कृत विद्वान थे, जिन्हें आदरपूर्वक 'मैथिल कवि कोकिल' (मिथिला का कोयल) कहा जाता है। वे विशेष रूप से राधा-कृष्ण के प्रेम वर्णन और भगवान शिव ...

बादल को घिरते देखा है: व्याख्या और भावार्थ (Class 11) | नागार्जुन

बादल को घिरते देखा है: व्याख्या और भावार्थ (Class 11) परिचय: हिंदी साहित्य के प्रगतिवादी कवि बाबा नागार्जुन की यह कविता ' बादल को घिरते देखा है ' प्रकृति प्रेम और यथार्थवाद का बेजोड़ उदाहरण है। यह उनके काव्य संग्रह ' युगधारा ' से ली गई है और Class 11 Hindi (Antara) पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 📥 Click Here to Download PDF Notes (Notes अंत में दिए गए हैं) 📌 परीक्षा उपयोगी: सप्रसंग व्याख्या का प्रारूप संदर्भ (Reference): प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग-1' (Class 11) की कविता 'बादल को घिरते देखा है' से ली गई हैं। इसके रचयिता प्रगतिवादी कवि नागार्जुन हैं। प्रसंग (Context): इन पंक्तियों में कवि ने हिमालय के सौंदर्य और बादलों के घिरने का यथार्थवादी चित्रण किया है। विशेष (Key Points): 1. भाषा सरल और तत्सम प्रधान है। 2. प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। नीचे हम पूरी कविता का Stanza-wise Meaning (पद-व्याख्या) और शब्दार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं। 1. हिमालय और मा...