सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रेरणा: बाबा नागार्जुन 'यात्री' की प्रसिद्ध मैथिलि कविता | Prerna Maithili Poem by Nagarjun

प्रेरणा: बाबा नागार्जुन 'यात्री' की प्रसिद्ध मैथिलि कविता | Prerna Maithili Poem by Nagarjun

जगमे सभसौं पछुआयल छी,
मैथिल गण! आबहु आगु बढू;
निज अवनति-खाधिक बाधक भै
मिलि उन्नति-शिखरक उपर चढू।


अछि हाँइ-हाँइ कै लागि पड़ल
सभ अपना-अपना उन्नतिमे,
उत्थानक एहि सुभग क्षणमे
घर बैसि अहीं ने बात गढू।


‘राणा प्रताप, शिवराज, तिलक’
हिनका लोकनिक जीवन-कृति सैं,
तजि आलसकेँ प्रिय बन्धु वृन्द!
किछु सेवाभावक पाठ पढू।


भाषा, भूषा ओ भेष अपन हो
जगजियार झट जगभरिमे,
ई अटल प्रतिज्ञा ऐखन कै पुनि
मातृभूमि पर सोन मढू।

- यात्री

कविक बारे मे: बाबा नागार्जुन "यात्री"

बाबा नागार्जुन, जिनका असल नाम वैद्यनाथ मिश्र "यात्री" छल, मैथिलि आ हिन्दी साहित्यक एकटा प्रमुख स्तंभ छथि। हुनका 'जनकवि' (जनताक कवि) केर रूप मे जानल जाइत अछि। 'यात्री' हुनकर मैथिलि उपनाम छल।

हुनकर कविता मे सामाजिक चेतना, शोषणक विरुद्ध आवाज आ गामक माटिक सुगंधि भेटैत अछि। मैथिलि साहित्य मे हुनकर योगदान, खास क' 'पत्रहीन नग्न गाछ' (जाहि लेल हुनका साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल), अविस्मरणीय अछि।

अहाँक लेल आओर कविता

जँ अहाँ केँ ई कविता नीक लागल, तँ हमर ई संग्रह सेहो अवश्य पढ़ू:

हमर मैथिलि संग्रह सँ:

हिन्दी साहित्यशाला सँ:

अपन विचार साझा करू

बाबा नागार्जुनक "प्रेरणा" कविता अहाँ केँ केहन लागल? अपन विचार नीचाँ कमेंट बॉक्स मे अवश्य लिखू।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नागार्जुन की मैथिली कविता 'विलाप' (अर्थ सहित) | Vilap by Nagarjun

नागार्जुन की प्रसिद्ध मैथिली कविता: विलाप विलाप - Vilap बाबा नागार्जुन: मैथिली के 'यात्री' बाबा नागार्जुन (मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र) को हिंदी साहित्य में उनके प्रगतिशील और जनवादी लेखन के लिए जाना जाता है। 'सिंदूर तिलकित भाल' जैसी उनकी हिंदी कविताएँ जितनी प्रसिद्ध हैं, उतना ही गहरा उनका मैथिली साहित्य में 'यात्री' उपनाम से दिया गया योगदान है। मैथिली उनकी मातृभाषा थी और उनकी मैथिली कविताओं में ग्रामीण जीवन, सामाजिक कुरीतियों और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत चित्रण मिलता है। 'विलाप' कविता का परिचय नागार्जुन की 'विलाप' (Vilap) मैथिली साहित्य की एक अत्यंत मार्मिक और प्रसिद्ध कविता है। यह कविता, उनकी अन्य मैथिली कविताओं की तरह ही, सामाजिक यथार्थ पर गहरी चोट करती है। 'विलाप' का मुख्य विषय समाज की सबसे दर्दनाक कुरीतियों में से एक— बाल विवाह (Child Marriage) —और उसके फलस्वरूप मिलने वाले वैधव्य (Widowhood) की पीड़ा है। यह कविता एक ऐसी ही बाल विधवा की मनोदशा का सजीव चित्रण करती है। नान्हिटा छलौँ, दूध पिबैत रही राजा-रानीक कथा सुनैत रही घर-आँग...

Vidyapati Poems: Shiv Nachari Lyrics (Maithili/Hindi) & Meaning | एत जप-तप

महाकवि विद्यापति : शिव नचारी (एत जप-तप) कल्पना कीजिये उस माँ की पीड़ा की, जिसने अपनी कोमल पुत्री के लिए राजकुमार सोचा था, पर द्वार पर भस्म रमाये, सर्पों की माला पहने एक जोगी आ खड़ा हुआ। यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि लोक-व्यवहार और अध्यात्म का द्वंद्व है। 'मैथिल कोकिल' विद्यापति की यह प्रसिद्ध 'शिव नचारी' उसी वात्सल्य और चिंता का मर्मस्पर्शी चित्रण है। आइये, इस रचना का मूल पाठ, अंग्रेजी लिप्यंतरण (Lyrics) और सरल हिंदी भावार्थ पढ़ते हैं। The Ascetic Shiva: A Mother's Worry शिव नचारी (Maithili Lyrics) एत जप-तप हम की लागि कयलहु, कथि लय कयल नित दान। हमर धिया के इहो वर होयताह, आब नहिं रहत परान। नहिं छनि हर कें माय-बाप, नहिं छनि सोदर भ...

बादल को घिरते देखा है: व्याख्या और भावार्थ (Class 11) | नागार्जुन

बादल को घिरते देखा है: व्याख्या और भावार्थ (Class 11) परिचय: हिंदी साहित्य के प्रगतिवादी कवि बाबा नागार्जुन की यह कविता ' बादल को घिरते देखा है ' प्रकृति प्रेम और यथार्थवाद का बेजोड़ उदाहरण है। यह उनके काव्य संग्रह ' युगधारा ' से ली गई है और Class 11 Hindi (Antara) पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 📥 Click Here to Download PDF Notes (Notes अंत में दिए गए हैं) 📌 परीक्षा उपयोगी: सप्रसंग व्याख्या का प्रारूप संदर्भ (Reference): प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग-1' (Class 11) की कविता 'बादल को घिरते देखा है' से ली गई हैं। इसके रचयिता प्रगतिवादी कवि नागार्जुन हैं। प्रसंग (Context): इन पंक्तियों में कवि ने हिमालय के सौंदर्य और बादलों के घिरने का यथार्थवादी चित्रण किया है। विशेष (Key Points): 1. भाषा सरल और तत्सम प्रधान है। 2. प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। नीचे हम पूरी कविता का Stanza-wise Meaning (पद-व्याख्या) और शब्दार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं। 1. हिमालय और मा...