मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति केवल एक कवि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और शारीरिक मनोविज्ञान के एक कुशल चितेरे थे। जब हम मैथिली साहित्य की संरचना और उसके भविष्य पर विचार करते हैं, जैसा कि हमने अपनी Maithili Sahitya Structural Solutions Roadmap रिपोर्ट में चर्चा की है, तो हमें यह स्वीकारना पड़ता है कि विद्यापति की 'पदावली' वह नींव है जिस पर यह पूरा साहित्य खड़ा है। आज हम जिस पद "पहिलें बदरि कुच पुन नवरंग" का विश्लेषण कर रहे हैं, वह 'वयःसंधि' (Vayas Sandhi) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह बचपन और यौवन के बीच की वह दहलीज है जहाँ शरीर बदलता है और मन 'अनंग' (कामदेव) की पीड़ा और कौतूहल से भर जाता है। जिस तरह बाबा नागार्जुन ने अपनी कविताओं में राजनीतिक विप्लव को देखा—उदाहरण के लिए Khichdi Viplav Dekha Humne —उसी तीव्रता से विद्यापति ने यहाँ 'शारीरिक विप्लव' (Physical Revolution) को देखा है। Vidyapati Pad: Pahilen Badri Kuch Pun Navrang (Lyrics) विद्यापति के शृंगारिक पदों में उपमाओं (Metaphors) का प्रयोग विज्ञान क...
होम » मैथिली लोकगीत » रंगीला ई बिहार भ गेलै रंगीला ई बिहार भ गेलै लिरिक्स – विक्रम बिहारी | रंगीला बिहार इवेंट (पवन सिंह) बिहार की अस्मिता, संस्कृति और 'रंगीला बिहार' 2026 महा-आयोजन का उत्सव। "रंगीला ई बिहार भ गेलै" (Rangila E Bihar Bha Gelae) केवल एक गीत की पंक्ति नहीं है, बल्कि यह बदलते बिहार और उसकी सांस्कृतिक चेतना का उद्घोष है। हाल ही में विक्रम बिहारी (Vikram Bihari) द्वारा गाया गया यह मैथिली गीत सोशल मीडिया और सांस्कृतिक मंचों पर खूब गूंज रहा है। साहित्यिक दृष्टिकोण से देखें, तो यह गीत विस्थापन, संघर्ष और अपनी जड़ों के प्रति प्रेम के बीच खड़े बिहारी मन की आवाज़ है। जिस तरह मिथिले (Mithile) कविता में क्षेत्र के गौरव का गान है, वैसे ही यह गीत आधुनिक बिहार की 'रंगीनियत' यानी उसकी विविधता को दर्शाता है। इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर में होने वाले आगामी 'रंगीला बिहार' (Rangeela Bihar) इवेंट, जिसका नेतृत्व पावरस्टार पवन सिंह कर रहे हैं, ने इस वाक्यांश को एक आंदोलन का ...