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दिसंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Jug Jug Jiya Su Lalanwa Lyrics & Meaning | जुग जुग जियसु ललनवा

Jug Jug Jiya Su Lalanwa – Maithili Sohar Lyrics, Meaning & Cultural Analysis मिथिला की लोक-संस्कृति में शिशु का जन्म केवल एक पारिवारिक घटना नहीं होता—यह पूरे घर और कुल के भाग्य के जागरण का उत्सव होता है। ऐसे ही पावन अवसर पर गाया जाने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध मैथिली सोहर (Sohar) है — “जुग जुग जियसु ललनवा” (Jug Jug Jiya Su Lalanwa) । A mother gently blessing her newborn while women sing the Maithili Sohar “Jug Jug Jiya Su Lalanwa” — a traditional birth song of Mithila. यह गीत किसी मंदिर या मंच के लिए नहीं, बल्कि आँगन, किवाड़ और घरेलू स्त्रियों की सामूहिक स्मृति के लिए रचा गया है। मैथिली परंपरा में ललनवा शब्द केवल पुत्र नहीं, बल्कि नवजात शिशु—पुत्र या पुत्री—दोनों के लिए प्रेम, आशा और वंश-दीपक का प्रतीक है। मैथिली परंपरा में “सोहर” क्या है? सोहर...

मिथिले - Mithile | Maithili Patriotic Poem by Baba Nagarjun (Yatri) | Meaning & Lyrics

🔥 New Release: "संयुक्ताक्षर" (Sanyuktakshar) - Read the viral poem defining Love through Grammar मैथिली साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर और जनकवि बाबा नागार्जुन (जिन्हें मैथिली में 'यात्री' जी के नाम से जाना जाता है) की कविताएँ केवल शब्द नहीं, बल्कि मिथिला की आत्मा हैं। आज हम उनकी एक अद्भुत देशभक्तिपूर्ण रचना "मिथिले" (Mithile) का रसास्वादन करेंगे। इस कविता में 'यात्री' जी ने मिथिला के गौरवशाली अतीत, ऋषियों की तपस्या, विद्वानों की प्रतिभा और वर्तमान की विडंबना का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। यह कविता हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपने इतिहास पर गर्व करने की प्रेरणा देती है। "मुनिक शान्तिमय-पर्ण कुटीमे..." — Remembering the ancient spiritual glory of Mithila. मिथिले (Mithile) कवि: वैद्यनाथ मिश्रा "यात्री" मुनिक शान्तिमय-पर्ण कुटीमे, तापस...

छीप पर रहओ नचैत - Chip Par Rahau Nachait | Maithili Poem by Baba Nagarjun (Yatri) | Meaning & Analysis

मैथिली साहित्य के शिखर पुरुष वैद्यनाथ मिश्रा 'यात्री' (जिन्हें हिंदी साहित्य में बाबा नागार्जुन के नाम से जाना जाता है) की लेखनी में केवल विद्रोह ही नहीं, बल्कि गहरा दार्शनिक चिंतन भी है। उनका जीवन और संघर्ष उनकी कविताओं में स्पष्ट झलकता है। आज हम उनकी एक प्रतीकात्मक कविता "छीप पर रहओ नचैत" (Chip Par Rahau Nachait) का पाठ और विश्लेषण करेंगे। यह कविता 'दीप-शिखा' (Flame) और 'शलभ' (Moth) के माध्यम से जीवन, बलिदान और अस्तित्व के विलय की कथा कहती है। जहाँ उनकी कविता 'भावी पीढ़ीक दर्द' सामाजिक यथार्थ को दिखाती है, वहीं यह कविता आध्यात्मिक गहराई को छूती है। "नाचथु शलभ - समाज..." — The eternal dance of sacrifice around the golden flame. छीप पर रहओ नचैत कवि: वैद्यनाथ मिश्रा "यात्री" छीप पर रहओ नचैत कनकाभ शिखा उगिलैत रहओ स्निग्ध बाती ...

Bhaavik Peedhi Dard - भावी पीढ़ीक दर्द | Maithili Poem by Upendra Doshi (Analysis)

🔥 New Release: 26 जनवरी विशेष: गणतंत्र दिवस पर सर्वश्रेष्ठ हिंदी कविताएँ मैथिली साहित्य में सामाजिक चेतना और व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर उपेन्द्र दोषी (Upendra Doshi) की कविताएँ पाठक को झकझोरने की क्षमता रखती हैं। उनकी रचना "भावी पीढ़ीक दर्द" (Bhaavik Peedhi Dard) केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। इस कविता में कवि ने वर्तमान व्यवस्था (System) की चापलूसी, भ्रष्टाचार और उस 'कर्ज' (Debt) की बात की है जो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ रहे हैं। जिस तरह 'गोठ बिछनी' में गरीबी का चित्रण है, वैसे ही यहाँ 'बौद्धिक और आर्थिक दिवालियेपन' का चित्रण है। आइये, इस मर्मस्पर्शी कविता का पाठ करें और इसका अर्थ समझें। "अहाँक व्यवस्था बड़ तीत..." — A satire on the bitter system. भावी पीढ़ीक दर्द (Bhaavik Peedhi Dard) कवि: उपेन्द्र दोषी मीत ! अहाँक व्यव...

स्वदेशमहिमा - Swadeshmahima | Maithili Patriotic Poem by Sitaram Jha | Meaning & Analysis

मैथिली साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र कविवर सीताराम झा की लेखनी ने न केवल ज्योतिष और व्याकरण को समृद्ध किया, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को भी जगाया। उनकी प्रसिद्ध कविता "स्वदेशमहिमा" (Swadeshmahima) देशभक्ति का एक ऐसा मंत्र है जो हमें अपनी मिट्टी से जोड़ता है। जिस प्रकार हम गणतंत्र दिवस पर हिंदी कविताएँ पढ़कर गर्व महसूस करते हैं, उसी प्रकार 'स्वदेशमहिमा' हर मैथिल के हृदय में स्वाभिमान भर देती है। इस कविता में कवि ने सिद्ध किया है कि अपनी मातृभूमि का सुख, स्वर्ग और मोक्ष (अपवर्ग) से भी बढ़कर है। आइये, इस कालजयी रचना का पाठ करें और इसका अर्थ समझें। "नै बिसरै’ अछि कीर तथापि... निज नीड़" — Even in a golden cage, the soul longs for its own home. स्वदेशमहिमा (Swadeshmahima) कवि: सीताराम झा 1. उत्कर्ष (Comparison) सम्प्रति पण्डितवृन्दक हो गणना, जहि रूप गणेशक सम्मुख, अंडिक त...

करूणा भरल ई गीत हम्मर | Karuna Bharal Ee Geet Hammar (Maithili Lyrics & Meaning)

मैथिली साहित्य में करुणा और वेदना (Pain and Compassion) का स्थान अत्यंत गहरा है। जहाँ विद्यापति की नचारी में भक्ति की करुणा है, वहीं आधुनिक मैथिली कविता में टूटे हुए सपनों की टीस है। आज हम मैथिली कवि धीरेन्द्र (Dhirendra) की एक अत्यंत भावुक रचना "करूणा भरल ई गीत हम्मर" (Karuna Bharal Ee Geet Hammar) का पाठ और विश्लेषण करेंगे। यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे हृदय की पुकार है जिसने 'नंदन वन' (स्वर्ग) बसाने का सपना देखा था, लेकिन उसे नसीब हुए सिर्फ 'अंगार' (Embers)। आइये, इस रचना की गहराइयों में उतरें। "अश्रुटा उपहार..." - A song of compassion and loss. करूणा भरल ई गीत हम्मर कवि: धीरेन्द्र करूणा भरल ई गीत हम्मर, प्राणकेर झंकार। दए रहल छी हम जगतकें अश्रुटा उपहार। सोचने छलहुँ दुनियाँ बसाबी, सोचने छलहुँ नन्दन लगाबी, स्वप्न छल जे बस उतारी स्वर्ग हम साकार। ह...

इजोत लए - Ejot Lay | Gangesh Gunjan Maithili Poem (Satire on Democracy)

मैथिली साहित्य के आधुनिक स्तंभ और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता गंगेश गुंजन (Gangesh Gunjan) अपनी प्रखर लेखनी और मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताएँ केवल भावुकता का प्रदर्शन नहीं करतीं, बल्कि वे हमारे समय की 'राजनीतिक विद्रूपता' (Political Absurdity) पर एक सर्जिकल स्ट्राइक की तरह होती हैं। आज हम उनकी बहुचर्चित कविता "इजोत लए" (Ejot Lay - प्रकाश के लिए) का गंभीर विश्लेषण करेंगे। यह कविता लोकतंत्र के गिरते स्तर, मीडिया के भ्रमजाल (Media-Maya), और 'गांधी बनाम गोधरा' के द्वंद्व को रेखांकित करती है। जिस तरह बाबा नागार्जुन ने व्यवस्था के खिलाफ हुंकार भरी थी, गंगेश गुंजन जी यहाँ व्यवस्था की 'अंधेरी रूह' का पोस्टमार्टम करते हैं। "भुक-भुक इजोत उजागर अछि..." — A flicker of truth in the colorful darkness. इजोत लए (Ejot Lay) कवि: गंगेश गुंजन अन्हरिए ...