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Jagdamb Ahin Awlamb Hamar Lyrics: Deep Meaning & PDF Download

क्या आप इस भौतिक संसार की अंतहीन दौड़ में सच्ची मानसिक शांति और सुकून की तलाश कर रहे हैं? जब जीवन की नाव संकटों के भंवर में फंस जाती है और दुनिया के सारे सहारे टूट जाते हैं, तब आत्मा स्वाभाविक रूप से जगत-जननी माँ भगवती के चरणों में पूर्ण शरणागति (Absolute Surrender) ढूँढती है।

मैथिली साहित्य की समृद्ध परंपरा में, जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर (Jagdamb Ahin Awlamb Hamar) केवल एक वंदना नहीं है; यह एक असहाय भक्त के हृदय का वह आर्तनाद है, जो सीधे ईश्वर से जुड़ता है। मैथिली पुत्र 'प्रदीप' द्वारा रचित यह भजन मिथिला के कण-कण में बसा है। आज हम न केवल इस भजन के प्रामाणिक बोल (Lyrics) प्रस्तुत कर रहे हैं, बल्कि इसके गहरे मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक भावार्थ का भी विश्लेषण करेंगे।

Jagdamb Ahin Awlamb Hamar Lyrics Maithili Bhagwati Vandana
चित्र: माँ भगवती - जीवन के भंवर में एकमात्र परम सहारा।

Jagdamb Ahin Awlamb Hamar Lyrics (जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर)

जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर,
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?
जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर॥

हम जग भरि स‌ ठुकरायल छी,
माता के सरन में आयल छी। (२)
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?

हम भरि जग स‌ ठुकरायल छी,
माँ अहाँ क‌ सरन में आयल छी,
अछि बीच भवर में नाव हमर।
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?
जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर॥

कलि लक्ष्मी, कलि कल्याणी छथि,
तारा, अम्बे, ब्रम्हाणी छथि। (२)
करू माफ जननी अपराध हमर,
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?
जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर॥

ज‌ माये अहाँ दुःख न‌ सुनबइ,
त ज‌ ए कहि ककर‌ कहबइ? (२)
अछि पुत्र प्रदीप बनल टगर,
हे माये अहाँ बिनु आस केकर?
जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर॥

कठिन शब्दार्थ (Hard Words Meaning)

अवलम‌ब (Awlamb) सहारा, आधार या आश्रय (Ultimate Support/Anchor)।
भवर (Bhavar) भंवर, जीवन की मुसीबतें या चक्रव्यूह (Whirlpool of worldly problems)।
टगर (Tagar) अनाथ, बेसहारा या दर-दर भटकने वाला व्यक्ति (An orphaned or wandering soul)।
आस केकर (Aas Kekar) किसकी उम्मीद या आसरा (Whose hope or expectation)।

भजन का गहरा मनोवैज्ञानिक भावार्थ (Deep Explanation)

इस भजन को गाते या सुनते समय श्रोता एक गहरे कैथार्सिस (Catharsis) से गुजरता है। पहली पंक्ति "जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर" सीधे तौर पर इस संसार की नश्वरता को स्वीकारती है। भक्त (कवि प्रदीप) यह स्वीकार करता है कि उसे पूरी दुनिया ने ठुकरा दिया है (हम जग भरि स‌ ठुकरायल छी)। यह वह अवस्था है जहाँ मनुष्य का अहंकार पूरी तरह से नष्ट हो जाता है और वह एक अबोध बालक की तरह माँ के आँचल में छुप जाना चाहता है।

भजन में प्रयुक्त रूपक "अछि बीच भवर में नाव हमर" मनुष्य के मानसिक संघर्ष और चिंताओं को दर्शाता है। अंत में कवि अपनी पहचान "प्रदीप बनल टगर" के रूप में देते हैं—अर्थात एक ऐसा बेसहारा पुत्र जो अपनी गलतियों (अपराध) की क्षमा माँगते हुए माँ की करुणा की भीख माँग रहा है। यह भजन हमें सिखाता है कि पूर्ण समर्पण में ही परम शांति का वास है।

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अतिरिक्त जानकारी (Authoritative References): भारतीय लोक भाषाओं और मैथिली साहित्य के ऐतिहासिक महत्व एवं संरक्षण पर विस्तृत शोध पढ़ने के लिए आप साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के प्रमाणित अभिलेखों का अध्ययन कर सकते हैं।

आनंद लें इस वंदना के मधुर गायन का (Soulful Renditions)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर" के मूल रचयिता कौन हैं?
A: इस कालजयी भक्ति गीत की रचना मिथिला के प्रख्यात कवि 'मैथिली पुत्र प्रदीप' (प्रभु नारायण झा) ने की है। उनकी रचनाएं अपनी भावुकता और सरलता के लिए पूरे मिथिलांचल में पूजनीय हैं।

Q2: मिथिला में यह वंदना विशेष रूप से कब गाई जाती है?
A: यह गीत मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा, कन्या पूजन और मिथिलांचल (बिहार एवं नेपाल) के घरों में दैनिक प्रातःकालीन स्तुति के समय अत्यंत भक्ति-भाव से गाया जाता है।

Q3: इस गीत में 'अवलम‌ब' शब्द का क्या तात्पर्य है?
A: 'अवलम‌ब' का अर्थ है 'सहारा' या 'आधार'। भक्त इस गीत के माध्यम से यह कह रहा है कि इस विशाल और निर्मम संसार में माँ भगवती ही उसका एकमात्र अटल सहारा हैं।

निष्कर्ष (Conclusion): जगदम्ब अहीं अवलम‌ब हमर का आध्यात्मिक गुरुत्व मात्र एक धार्मिक गान होने से कहीं अधिक है; यह एक मनोवैज्ञानिक विरेचन (Psychological Unburdening) है। इन पंक्तियों को गुनगुना कर या केवल सुनकर, आप उस प्राचीन परंपरा का हिस्सा बनते हैं जहाँ पूर्ण समर्पण के माध्यम से स्वयं को स्थिर किया जाता है। जब भी आपके जीवन की नाव अनिश्चितताओं के भंवर में फँसे, इस वंदना को अपना मानसिक लंगर (Anchor) बनने दें।

इस दिव्य गूंज को हमेशा अपने करीब रखने के लिए, साहित्यशाला (Sahityashala) के इस पृष्ठ को बुकमार्क अवश्य करें और मिथिला की इस अनमोल धरोहर को अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं। जय माता दी!

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