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हो दीनानाथ लिरिक्स: सोना सट कुनिया छठ गीत का असली अर्थ!

हो दीनानाथ (सोना सट कुनिया) लिरिक्स (Ho Deenanath Chhath Geet) छठ पर्व केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर से प्रत्यक्ष संवाद (Direct Conversation) का महापर्व है। जब भोर के समय व्रती पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं और सूर्य देव को आने में विलंब हो जाता है, तो उस समय जो मार्मिक संवाद होता है, उसे "हो दीनानाथ (सोना सट कुनिया)" गीत में बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। हम अपने मंच पर लगातार छठ के अद्भुत गीतों का संकलन कर रहे हैं। जिस प्रकार "आठ ही काठ के कोठरिया" में भगवान के चमत्कार दिखाई देते हैं, और "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में समाज का हर वर्ग उन्हें पुकारता है, उसी शृंखला का यह गीत भगवान सूर्य की असीम दयालुता और चमत्कारों का साक्षात प्रमाण है। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और दीनानाथ को पुकारें प्रातःकाल (भिनसार) में जल में खड़े होकर सूर्य देव के उदित होने की प्रती...

अरघ के बेर हो पूजन के बेर लिरिक्स: अनुराधा पौडवाल का रुला देने वाला छठ गीत!

अरघ के बेर लिरिक्स (Aragh Ke Ber - Anuradha Paudwal) जब घाट पर भोर की ठंडी हवाएं चलती हैं और हर व्रती की आँखें आसमान में भगवान भास्कर को तलाश रही होती हैं, तब अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गूंजने वाला गीत— "उगs हो सुरुज देव अरघ के बेर" , संपूर्ण वातावरण को दिव्यता से भर देता है। यह गीत समाज की उस अटूट समानता का प्रतीक है, जहाँ हर वर्ग सूर्य देव की आराधना के लिए एक ही घाट पर खड़ा है। इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में इसी प्रकार की सामाजिक समरसता को समझा था। चाहे वह "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" का समर्पण हो या फिर "पहिले पहिल हम कईनी" की अपार श्रद्धा— हर गीत में छठ का मूल भाव एक ही है। यह गीत हमारी भारतीय संस्कृति और "अंगना में पोखरी खनायब" जैसी लोक-परंपराओं का वह जीता-जागता उदाहरण है, जो समाज के सभी भेदों को मिटाकर हमें एक कर देता है। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और साथ में गाएं ...

पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स: पहली बार छठ करने वालों का सबसे भावुक गीत!

पहिले पहिल हम कईनी लिरिक्स (Pahile Pahile Hum Kaini) छठ महापर्व के कठोर नियमों को देखकर जब कोई महिला जीवन में पहली बार यह व्रत (Fast) उठाती है, तो उसके मन में अपार श्रद्धा के साथ-साथ एक घबराहट भी होती है कि कहीं पूजा में कोई चूक न हो जाए। इसी असीम भक्ति, समर्पण और भय के सुंदर मिश्रण को दर्शाता है यह अमर गीत— "पहिले पहिल हम कईनी छठी मईया व्रत तोहार" । इससे पहले हमने "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में देखा था कि कैसे समाज का हर वर्ग भगवान भास्कर के सामने नतमस्तक होता है। यह नया गीत व्यक्तिगत समर्पण की पराकाष्ठा है। इसमें एक माँ अपने आँगन के बच्चे (गोदी के बलकवा) और पति के प्यार के लिए छठी मईया के सामने हाथ फैलाती है। यह गीत सुनकर आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हर व्यक्ति की आँखें छलक उठती हैं। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया से प्रार्थना करें घाट पर दीप जलाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हुई एक सुह...

उगह हो सूरज देव लिरिक्स: अनुराधा पौडवाल का रुला देने वाला छठ गीत!

उगह हो सूरज देव लिरिक्स (Ugaha Ho Suraj Dev Bhel Bhinsarva) सूर्योदय का वह अलौकिक दृश्य जब लाखों हाथ एक साथ आसमान की ओर उठते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती स्वयं स्वर्ग बन गई हो। अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गाया गया— "उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा" , छठ महापर्व का सबसे प्रतिष्ठित और हृदय को बेध देने वाला गीत है। यह गीत केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सूर्य देव से की गई सीधी गुहार है। इससे पहले हमने "अंगना में पोखरी खनायब" में देखा कि कैसे घर के आँगन को ही पवित्र घाट बना दिया जाता है। इस गीत में भगवान भास्कर के प्रति जो आस्था और ऊर्जा निहित है, उसकी तुलना सीधे तौर पर "राम की शक्ति पूजा (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)" की असीम ऊर्जा और संकल्प से की जा सकती है। निराला जी की रचना में जहाँ भगवान राम सूर्य की उपासना कर शक्ति का आह्वान करते हैं— "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन...

अंगना में पोखरी खनायब छठि मैया लिरिक्स: सबसे पावन स्वागत गीत!

अंगना में पोखरी खनायब छठि मैया लिरिक्स (Chhathi Maiya Ayetan Aaj) जब घर-आँगन में साफ़-सफाई शुरू हो जाती है और हवाओं में एक पवित्र मिठास घुल जाती है, तो समझ लीजिए कि महापर्व छठ का समय आ गया है। छठी मईया के आगमन की खुशी और उनके सत्कार को दर्शाता यह अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत— "अंगना में पोखरी खनायब, छठि मैया अयतन आय" , हर व्रती के हृदय की सच्ची भावना है। हमारे पिछले लेखों में आपने "आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ" में भगवान के चमत्कारों को देखा और "मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया" में एक सुहागिन की आदर्श परिवार की कामना को समझा। यह गीत उसी मिथिला की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है, जहाँ देवों को घर के आँगन में ही आमंत्रित किया जाता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस मधुर गीत के हर एक शब्द में बसने वाले समर्पण को महसूस करें। ▶️ यहाँ क्लिक करके सीधा वीडियो देखें और छठी मईया का स्वागत करें उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को ...