हो दीनानाथ (सोना सट कुनिया) लिरिक्स (Ho Deenanath Chhath Geet)
छठ पर्व केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर से प्रत्यक्ष संवाद (Direct Conversation) का महापर्व है। जब भोर के समय व्रती पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं और सूर्य देव को आने में विलंब हो जाता है, तो उस समय जो मार्मिक संवाद होता है, उसे "हो दीनानाथ (सोना सट कुनिया)" गीत में बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है।
हम अपने मंच पर लगातार छठ के अद्भुत गीतों का संकलन कर रहे हैं। जिस प्रकार "आठ ही काठ के कोठरिया" में भगवान के चमत्कार दिखाई देते हैं, और "उगह हो सूरज देव भेल भिनसरवा" में समाज का हर वर्ग उन्हें पुकारता है, उसी शृंखला का यह गीत भगवान सूर्य की असीम दयालुता और चमत्कारों का साक्षात प्रमाण है।
🎶 हो दीनानाथ: सोना सट कुनिया (मूल लिरिक्स)
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया
बालक दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
🎶 Ho Deenanath (Hinglish Lyrics)
Sona sat kuniya, ho deenanath
He ghoomaichha sansaar, he ghoomaichha sansaar
Aan din ugai chha ho deenanath
Aahe bhor bhinasaar, aahe bhor bhinasaar
Aaju ke dinawa ho deenanath
He laagal eti ber, he laagal eti ber
Baat mein bhetie gel ge abalaa
Ekat aanhara purush, ekat aanhara purush
Ankhiya diyete ge abalaa
He laagal eti ber, he laagal eti ber
Baat mein bhetie gel ge abalaa
Ekat baajhiniyaa, ekat baajhiniyaa
Baalak diyete ge abalaa
He laagal eti ber, he laagal eti ber
📖 लोक-साहित्य और शब्दों का गहरा अर्थ (Glossary)
इस गीत की सुंदरता इसके देहाती और पारंपरिक शब्दों में छिपी है। साहित्य अकादमी के अनुसार, इन लोकगीतों के शब्द ही असली साहित्य हैं:
| पारंपरिक शब्द (Word) | मूल अर्थ (Meaning) | गीत में संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| सोना सट कुनिया | सोने का रथ / स्वर्ण आभूषण | सूर्य देव के अलौकिक रथ का वर्णन, जो सोने (स्वर्ण) से मढ़ा हुआ है और जिससे वे पूरे संसार का भ्रमण करते हैं। |
| भोर भिनसार | तड़के सुबह (Dawn) | वह समय जब आसमान में लाली छा जाती है लेकिन सूरज पूरी तरह से उदित नहीं होता। |
| बाझिनिया | निस्संतान महिला | समाज का वह उपेक्षित वर्ग जो केवल छठी मईया की कृपा पर निर्भर है। भगवान रास्ते में उसी महिला को संतान का वरदान दे रहे थे। |
✨ गीत का असली अर्थ और भावार्थ (Analysis)
यह गीत ईश्वर की दयालुता का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब घाट पर खड़ी व्रती महिलाएं सूर्य देव से पूछती हैं:
"हे दीनानाथ, आप रोज़ाना (आन दिन) तो सुबह-सुबह (भोर भिनसार) ही उग जाते हैं, लेकिन आज के इस पावन दिन आपको उदित होने में इतनी देर (एती बेर) क्यों लग गई?"
तब सूर्य देव बहुत ही करुणा भरे स्वर में अपनी भक्त (अबला) को उत्तर देते हैं:
"हे भक्त! आज जब मैं उदित होने आ रहा था, तो रास्ते (बाट) में मुझे एक अंधा पुरुष मिल गया था। उस नेत्रहीन को आँखें (अंखिया) देने में मुझे देर हो गई। उसके बाद मुझे एक निस्संतान महिला (बाझिनिया) रोती हुई मिली। उसकी गोद भरने और उसे संतान (बालक) का सुख देने में मुझे आज इतनी देर लग गई।"
▶️ 'हो दीनानाथ' का यह रूहानी वीडियो देखें
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❓ गीत से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र 1: सूर्य देव को आने में देरी क्यों हुई?
गीत के अनुसार, सूर्य देव को उदित होने में इसलिए देर हुई क्योंकि वे रास्ते में एक अंधे व्यक्ति को आँखों की रोशनी और एक निस्संतान महिला को संतान का सुख प्रदान कर रहे थे। यह उनकी असीम करुणा को दर्शाता है।
प्र 2: "भोर भिनसार" का क्या अर्थ है?
भोजपुरी और मैथिली में 'भोर भिनसार' का अर्थ 'तड़के सुबह' या अरुणोदय (Dawn) का समय होता है, जब सूर्य की पहली लाल किरणें आसमान में छाने लगती हैं।
प्र 3: क्या यह गीत शारदा सिन्हा जी ने भी गाया है?
जी हाँ, इस गीत के बोल (सोना सट कुनिया) बहुत ही पारंपरिक हैं और इसे शारदा सिन्हा सहित कई महान लोक-गायिकाओं ने अपनी आवाज़ दी है। बिहार पर्यटन भी इसे छठ की आत्मा मानता है।
🙏 छठी मईया और सूर्य देव आपके सारे संकट हरें!
भारतीय लोकगीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती और भारतीय संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से आज हमारी मौखिक लोक-परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है।
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