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आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ लिरिक्स: शारदा सिन्हा का रुला देने वाला छठ गीत!

आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ लिरिक्स (Aath Hi Kath Ke Kothariya)

स्वर कोकिला शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) की आवाज़ के बिना छठ पर्व की कल्पना भी अधूरी है। उनकी जादुई आवाज़ में गाया गया गीत— "आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ", आस्था, दुःख और भगवान भास्कर के चमत्कारों की एक अमर गाथा है। यह गीत केवल प्रार्थना नहीं है; यह एक निस्संतान माँ, एक नेत्रहीन व्यक्ति और एक कुष्ठ रोगी की वह पुकार है जो सीधे भगवान के हृदय तक पहुँचती है।

हमारी पिछली कड़ियों में आपने "मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया" में एक सुहागिन के आदर्श परिवार की कामना को पढ़ा था। वहीं "हे छठि मैया हरु दुख मोर हे" में परदेसी का दर्द झलकता है। इस नए गीत की गहराई हमें मिथिला की संपूर्ण सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है। इसका समर्पण बिल्कुल वैसा ही है जैसा मीरा बाई के भजनों में मिलता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस अत्यंत भावुक लोकगीत के गहरे अर्थ में गोता लगाएँ।

संध्या के समय दीप जलाती महिला - आठ ही काठ के कोठरिया गीत का दृश्य
संध्या बेला में घाट पर दीप जलाकर सूर्य देव से अपने संकट दूर करने की प्रार्थना करते श्रद्धालु।

🎶 आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ (मूल लिरिक्स)

आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ
रुपे छन लागल केवार
आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ
रुपे छन लागल केवार

ताहि ऊपर चढ़ि सुतले हो दीनानाथ
बांझि केवरवा धईले ठाड़
ताहि ऊपर चढ़ि सुतले हो दीनानाथ
बांझि केवरवा धैले ठाड़

चद्दर उघारि जब देखले हो दीनानाथ
कौने संकट परल तोहार
पुत्र संकट परल मोरा हो दीनानाथ
ओहिले केवरवा धईले ठाड़

चद्दर उघारि जब देखले हो दीनानाथ
कोना संकट परल तोहार
नयना संकट परल मोरा हो दीनानाथ
ओहिले केवरवा धईले ठाड़

चद्दर उघारि जब देखले हो दीनानाथ
कौन संकट परल तोहार
काया संकट परल मोरा हो दीनानाथ
ओहिले केवरवा धईले ठाड़

बांझिनी के पुत जब दिहले हो दीनानाथ
खेलत कुदत घर जात
अन्हरा के आंख दिहले कोढ़िया के कायवा
हंसत बोलत घर जात
स्वर: शारदा सिन्हा

🎶 Aath Hi Kath Ke Kothariya (Hinglish Lyrics)

Aath hi kath ke kothariya ho dinanath
Rupe chhan laagal kemaar
Aath hi kath ke kothariya ho dinanath
Rupe chhan laagal kemaar

Taahi oopar chadhi sutale ho dinanath
Baanjhi kevarwa dhaile thaadh
Taahi oopar chadhi sutale ho dinanath
Baanjhi kevarwa dhaile thaadh

Chaddar ughaari jab dekhale ho dinanath
Kaune sankat paral tohaar
Putra sankat paral mora ho dinanath
Ohile kevarwa dhaile thaadh

Chaddar ughaari jab dekhale ho dinanath
Kona sankat paral tohaar
Nayana sankat paral mora ho dinanath
Ohile kevarwa dhaile thaadh

Chaddar ughaari jab dekhale ho dinanath
Kaun sankat paral tohaar
Kaaya sankat paral mora ho dinanath
Ohile kevarwa dhaile thaadh

Baanjhini ke put jab dihale ho dinanath
Khelat kudat ghar jaat
Anhara ke aankh dihale kodhiya ke kaaywa
Hansat bolat ghar jaat

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

यह गीत भगवान सूर्य (दीनानाथ) की दयालुता और उनके दरबार में हर दुखियारे की पुकार सुने जाने का अद्भुत वर्णन है। गीत का भाव कुछ इस प्रकार है:

  • भगवान का दरबार: "हे दीनानाथ! आपकी कोठरी (कक्ष) आठ प्रकार की पवित्र लकड़ियों (काठ) से बनी है, जिसके दरवाज़े (केवार) चाँदी (रुपे) से मढ़े हुए हैं। उसी कक्ष में आप विश्राम कर रहे हैं, और आपके दरवाज़े को पकड़कर एक निस्संतान (बाँझ) स्त्री खड़ी होकर रो रही है।"
  • भगवान का संवाद: "दीनानाथ अपनी चादर हटाकर उठते हैं और पूछते हैं— 'हे भक्त, तुम पर कौन सा संकट आ पड़ा है?' तब स्त्री उत्तर देती है— 'हे प्रभु, मुझ पर पुत्र का संकट है (अर्थात मेरी कोई संतान नहीं है), इसीलिए मैं आपके दरवाज़े पर खड़ी हूँ।'"
  • नेत्रहीन और रोगी की पुकार: इसी तरह एक नेत्रहीन (अंधा) व्यक्ति कहता है कि उसे 'नयना संकट' (आँखों की रोशनी न होना) है। वहीं एक कुष्ठ रोगी कहता है कि उसे 'काया संकट' (बीमार शरीर) है।
  • दीनानाथ का चमत्कार: "अंत में, दयालु दीनानाथ बाँझ स्त्री को पुत्र का वरदान देते हैं, और वह खुशी से खेलते-कूदते घर लौटती है। वह अंधे को आँखें और कोढ़ी को स्वस्थ काया (शरीर) प्रदान करते हैं, जिससे वे सभी हँसते-बोलते अपने घर वापस लौटते हैं।"

शारदा सिन्हा जी के स्वर में यह गीत बिहार की धरती के हर कण में बसता है। यह गीत बिल्कुल उन छठ गीतों (हाथ सटकुनियाँ) की तरह है, जहाँ समाज से ठुकराए गए लोगों को केवल भगवान सूर्य का ही सहारा होता है। साहित्य अकादमी और IGNCA द्वारा संरक्षित ये गीत हमारी सबसे अमूल्य धरोहर हैं, जो पीढ़ियों तक आस्था का दीप जलाए रखेंगे।

उषा अर्घ्य देती महिला - आठ ही काठ के कोठरिया गीत का दृश्य
उषा अर्घ्य के दौरान उगते सूर्य को जल देती हुई एक माँ, जिसके जीवन के सभी संकट छठी मईया ने हर लिए हैं।

▶️ शारदा सिन्हा जी की आवाज़ में यह भावुक वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ लोकगीतों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र 1: "आठ ही काठ के कोठरिया" का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'काठ' का अर्थ है लकड़ी (Wood) और 'कोठरिया' का अर्थ है कक्ष (Room)। हिंदू मान्यताओं में कुछ विशिष्ट पेड़ों की लकड़ियों को बहुत शुभ माना जाता है। यहाँ भगवान सूर्य का विश्राम कक्ष आठ प्रकार की पवित्र लकड़ियों से बना बताया गया है, जो उनकी दिव्यता को दर्शाता है।

प्र 2: इस गीत में "काया संकट" किसे कहा गया है?

उत्तर: 'काया' का अर्थ शरीर (Body) होता है। प्राचीन समय में कुष्ठ रोग (Leprosy) को एक बड़ा संकट माना जाता था। वेदों और पुराणों में सूर्य देव को आरोग्य (Health) का देवता माना गया है, इसीलिए रोगी अपनी काया को स्वस्थ करने की प्रार्थना उनसे करता है।

प्र 3: इस गीत की गायिका कौन हैं?

उत्तर: यह गीत पद्म भूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) जी द्वारा गाया गया है। उनकी आवाज़ के बिना बिहार और पूर्वांचल में छठ का त्योहार अधूरा माना जाता है।

🙏 छठी मईया और दीनानाथ आपके सभी संकट दूर करें!

भारतीय लोकगीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती और भारत सरकार के प्रयासों से आज हमारी मौखिक लोक-परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। भारत सरकार इन सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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