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मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया लिरिक्स: हर सुहागिन की सबसे पवित्र प्रार्थना!

मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया लिरिक्स (Hey Ganga Maiya Lyrics)

भारतीय लोकगीतों में आस्था और पारिवारिक आदर्शों का जो सुंदर संगम देखने को मिलता है, वह दुनिया के किसी अन्य साहित्य में दुर्लभ है। एक सुहागिन स्त्री के सपनों और उसके आदर्श परिवार की कामना को दर्शाता यह अत्यंत पवित्र लोकगीत— "मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया" (Maangila Hum Bardaan), सदियों से मिथिला और बिहार की महिलाओं के होंठों पर गूँजता आ रहा है।

इससे पहले हमने "हे छठि मैया हरु दुख मोर" में एक परदेसी का दर्द देखा था। आज का यह गीत हमें सीधे रामायण काल की पवित्रता में ले जाता है, जहाँ एक नारी अपने लिए मिथिला के जनकपुर जैसा नैहर (मायका) और अयोध्या जैसा ससुराल मांगती है। इस गीत का भाव और समर्पण बिल्कुल वैसा ही है जैसा हम मीरा बाई के भजनों (म्हाँने कह्यो मेरी माय) में देखते हैं। आइए, भारतीय संस्कृति के इस अमर लोकगीत के हर एक शब्द में बसने वाले राम-सीता के प्रेम को महसूस करें।

पवित्र नदी के घाट पर प्रार्थना करती सुहागिन - मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया
पवित्र नदी के जल में खड़े होकर अपने परिवार के लिए वरदान मांगती हुई एक सुहागिन महिला।

🎶 मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया (मूल लिरिक्स)

ओम नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय
मैया हे गंगा मैया -2

मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया
मांगीला हम बरदान
मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया
मांगीला हम बरदान
मांगीला हम बरदान
मैया हे गंगा मैया -2

जनक पुर नैहर दिह
सासुर अवधपुर समान
जनक पुर नैहर दिह
सासुर अवधपुर समान
सासुर अवधपुर समान
मैया हे गंगा मैया -2

राजा दशरथ ससुर दिह
सासु कौशिल्या समान
राजा दशरथ ससुर दिह
सासु कौशिल्या समान
सासु कौशिल्या समान
मैया हे गंगा मैया -2

पारबती हमरा बनैह
स्वामी शंकर समान
पारबती हमरा बनैह
स्वामी शंकर समान
स्वामी शंकर समान
मैया हे गंगा मैया -2

राम जैसन बेटा तू दिह
बेटी सीता समान
राम जैसन बेटा तू दिह
बेटी सीता समान
बेटी सीता समान
मैया हे गंगा मैया -4

🎶 Maangila Hum Bardaan (Hinglish Lyrics)

Om Namah Shivay
Om Namah Shivay
Om Namah Shivay
Maiya he Ganga Maiya -2

Maangila hum bardaan he ganga maiya
Maangila hum bardaan
Maangila hum bardaan he ganga maiya
Maangila hum bardaan
Maangila hum bardaan
Maiya he Ganga Maiya -2

Janakpur naihar diha
Saasur Awadhpur samaan
Janakpur naihar diha
Saasur Awadhpur samaan
Saasur Awadhpur samaan
Maiya he Ganga Maiya -2

Raja Dasharath sasur diha
Saasu Kaushalya samaan
Raja Dasharath sasur diha
Saasu Kaushalya samaan
Saasu Kaushalya samaan
Maiya he Ganga Maiya -2

Paarabati hamara banaiha
Swami Shankar samaan
Paarabati hamara banaiha
Swami Shankar samaan
Swami Shankar samaan
Maiya he Ganga Maiya -2

Ram jaisan beta tu diha
Beti Sita samaan
Ram jaisan beta tu diha
Beti Sita samaan
Beti Sita samaan
Maiya he Ganga Maiya -4

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

यह लोकगीत एक महिला की गंगा मैया से की गई वह प्रार्थना है, जिसमें वह अपने लिए दुनिया के सबसे आदर्श परिवार की कामना करती है। रामायण और शिव-पार्वती के प्रसंगों से सजा यह गीत कुछ इस प्रकार है:

  • नैहर और ससुराल की कामना: महिला गंगा मैया से कहती है, "हे मैया, मैं आपसे यह वरदान मांगती हूँ कि मुझे 'जनकपुर' (माता सीता की जन्मभूमि) जैसा पवित्र मायका (नैहर) देना और मेरी ससुराल 'अवधपुर' (अयोध्या) के समान महान और संपन्न हो।"
  • आदर्श सास-ससुर: "हे माँ, मुझे राजा दशरथ के समान न्यायप्रिय और दयालु ससुर देना, और मेरी सास माता कौशल्या के समान ममतामयी हो।"
  • अटूट सुहाग और पति: वह अपने सुहाग की कामना करते हुए कहती है, "हे गंगा मैया, मुझे माता पार्वती के समान अखंड सौभाग्यवती बनाना और मेरे पति (स्वामी) भगवान शिव (शंकर) के समान भोले, रक्षक और मुझ पर प्रेम लुटाने वाले हों।"
  • मर्यादा पुरुषोत्तम संतान: अंत में वह अपनी कोख से ऐसी संतानों की कामना करती है जो दुनिया के लिए मिसाल बनें— "मुझे भगवान राम के समान आज्ञाकारी और मर्यादा पुरुषोत्तम बेटा देना, और मेरी बेटी माता सीता के समान धर्मपरायण और पवित्र हो।"

इस गीत की हर पंक्ति इस बात का प्रमाण है कि बिहार की धरती और इसके लोकगीतों में रामायण कितनी गहराई तक बसी है। बिहार पर्यटन भी जनकपुर और सीतामढ़ी के इस सांस्कृतिक जुड़ाव को विश्व पटल पर रखता है। यह गीत बिल्कुल उन छठ गीतों (हाथ सटकुनियाँ) की तरह है, जहाँ स्त्री अपने परिवार की खुशहाली के लिए भगवान से सीधे संवाद करती है। साहित्य अकादमी और IGNCA द्वारा संरक्षित ये गीत हमारी सबसे अमूल्य धरोहर हैं।

संध्या के समय दीप जलाती महिला - मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया गीत का दृश्य
संध्या बेला में नदी के घाट पर दीप जलाकर अपने आदर्श परिवार की कामना करती हुई एक सुहागिन।

▶️ गंगा मैया का यह अद्भुत और भावुक वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ लोकगीतों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र 1: "जनक पुर नैहर दिह" का क्या महत्व है?

उत्तर: 'नैहर' का अर्थ मायका (Maternal home) होता है। राजा जनक का राज्य 'जनकपुर' (वर्तमान नेपाल/सीतामढ़ी क्षेत्र) माता सीता का मायका था, जो अपनी पवित्रता, न्याय और समृद्धि के लिए जाना जाता था। इसलिए हर लोकगीत में लड़कियाँ अपने मायके को जनकपुर के समान मानती हैं।

प्र 2: लोकगीतों में सास-ससुर की तुलना दशरथ और कौशल्या से ही क्यों की जाती है?

उत्तर: रामायण में राजा दशरथ और माता कौशल्या को आदर्श सास-ससुर का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने माता सीता को अपनी बेटी से भी बढ़कर प्रेम दिया। इसीलिए नवविवाहिता महिलाएँ गंगा मैया से वैसे ही प्रेमपूर्ण ससुराल की कामना करती हैं।

प्र 3: यह गीत मुख्य रूप से कब गाया जाता है?

उत्तर: यह एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति गीत है, जिसे मुख्य रूप से गंगा दशहरा, छठ पूजा के दौरान नदी स्नान करते समय, या विवाह के बाद विदाई और सुहाग की पूजा के समय ग्रामीण महिलाओं द्वारा समूह में गाया जाता है। संस्कृति मंत्रालय इसे भारत की मौखिक परंपरा का एक अहम हिस्सा मानता है।

🙏 गंगा मैया आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें!

भारतीय लोकगीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती और भारत सरकार के प्रयासों से आज हमारी मौखिक लोक-परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। भारत सरकार इन सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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