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हे छठि मैया हरु दुख मोर हे लिरिक्स: परदेसी का रुला देने वाला छठ गीत!

हे छठि मैया हरु दुख मोर हे लिरिक्स (He Chhathi Maiya Haru Dukh Mor)

जब छठ पूजा का पावन पर्व आता है, तो गाँव की माटी की खुशबू हर उस परदेसी (प्रवासी) को सताने लगती है, जो अपने घर से दूर है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'मिथिला मखान' (Mithila Makhaan) का यह सुप्रसिद्ध गीत— "हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे", उसी घर की याद, आँगन की रौनक और छठी मईया से अपने सारे दुखों को हरने (दूर करने) की करुण पुकार है।

हमारे पिछले लेखों में आपने "सोना सट कुनिया हो दीनानाथ" में भगवान के चमत्कारों को देखा, "हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ" में एक निस्संतान माँ का दर्द महसूस किया और "हमर मनक गाँव" की उदासीन गलियों को याद किया। यह नया गीत मिथिला के धिया सिया के उस गौरव को दर्शाता है, जहाँ सुख-दुख सब कुछ समाज के साथ साझा किया जाता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे रक्षाबंधन की भावुक कविताओं में भाई-बहन का अटूट प्रेम झलकता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस आधुनिक लेकिन जड़ों से जुड़े गीत में खो जाएँ।

संध्या अर्घ्य देती महिला - हे छठि मैया हरु दुख मोर गीत का दृश्य
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) के समय घाट पर दीप जलाते हुए श्रद्धालु, जो अपनी मनोकामनाओं के साथ भगवान सूर्य की आराधना कर रहे हैं।

🎶 हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे (मूल मैथिली लिरिक्स)

मिथिला में गीत गमकय गम गम सौंसे
दीनानाथ करियौ न भोर
मिथिला में गीत गमकय गम गम सौंसे
दीनानाथ करियौ न भोर

हे छठि मैया, लागय छी गोर हे
हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे

करुणा के रँगे रँगल, सिहरै बसतिया
दूर करू हे छठि मैया, विपदा के रतिया
सब गोटे, चलू संगे हटिया,
कीनब कुसियार संगे संगे,
कीनब सब क्यौ केरा केसौर

हे छठि मैया, लागय छी गोर हे
हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे

हमहूं जे सब खन गामे में रहितौं
सुख दुख सब गोटे संगे में सहितौं
संगे में सहितौं
कर जोड़ि, अहूं से अरज अछि,
किरपा करू दीनानाथ,
करू छठि मैया के शोर

हे छठि मैया, लागय छी गोर हे
हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे

पोखैरे में रीत सौंसे झम-झम बरसय
मिथिला के अंगना में इजोरिया हरसय
इजोरिया हरसय,
करू करू, घाटो पर अरिपन,
सेनूरक ठोप और बारू पथिया में दीपक इजोर

हे छठि मैया, लागय छी गोर हे
हे छठि मैया, हरु दुख मोर हे

🎶 He Chhathi Maiya Haru Dukh Mor (Hinglish Lyrics)

Mithila mein geet gamakay gam gam saunse
Deenanath kariyau na bhor
Mithila mein geet gamakay gam gam saunse
Deenanath kariyau na bhor

He chhathi maiya, laagay chhee gor he
He chhathi maiya, haru dukh mor he

Karuna ke range rangal, siharai basatiya
Door karoo he chhathi maiya, vipada ke ratiya
Sab gote, chaloo sange hatiya,
Keenab kusiyaar sange sange,
Keenab sab kyau kera kesaur

He chhathi maiya, laagay chhee gor he
He chhathi maiya, haru dukh mor he

Hamahoon je sab khan gaame mein rahiton
Sukh dukh sab gote sange mein sahiton
Sange mein sahiton
Kar jodi, ahoon se araj achhi,
Kirapa karoo deenanath,
Karoo chhathi maiya ke shor

He chhathi maiya, laagay chhee gor he
He chhathi maiya, haru dukh mor he

Pokhaire mein reet saunse jham-jham barasay
Mithila ke angana mein ijoriya harasay
Ijoriya harasay,
Karoo karoo, ghaato par aripan,
Senoorak thop aur baaroo pathiya mein deepak ijor

He chhathi maiya, laagay chhee gor he
He chhathi maiya, haru dukh mor he

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

यह गीत मिथिलांचल की उन यादों को ताज़ा करता है, जो कोई व्यक्ति परदेस में रहकर महसूस करता है। इसके भाव कुछ इस प्रकार हैं:

  • मिथिला की महक और पुकार: "संपूर्ण मिथिला में छठ के गीतों की महक गूंज रही है। हे दीनानाथ, जल्दी से सुबह (भोर) कर दीजिए। हे छठी मईया, मैं आपके पाँव (गोर) लगता हूँ, कृपया मेरे जीवन के सारे दुखों को हर (दूर कर) लीजिए।"
  • गाँव के हाट (बाज़ार) की यादें: "गाँव की बस्तियां करुणा और भक्ति के रंग में रंगी हुई हैं। हे माँ, हमारे जीवन की विपदा की रातों को दूर करो। काश! हम सब मिलकर गाँव के बाज़ार (हटिया) जाते और साथ में ईख (कुसियार), केले और पूजा का सारा सामान खरीदते।"
  • परदेसी का रुला देने वाला दर्द: "काश! मैं भी हर पल अपने गाँव (गामे) में ही रहता, और अपनों के साथ मिलकर सुख और दुख सहता।" वह हाथ जोड़कर (कर जोड़ि) दीनानाथ से प्रार्थना करता है कि छठी मईया की महिमा (शोर) चारों ओर फैले।
  • घाट की सुंदरता (अरिपन और दीपक): "गाँव के पोखरों (तालाबों) पर रीतियों की झम-झम बारिश हो रही है और मिथिला के आँगन में चाँदनी (इजोरिया) खिल उठी है। चलिए, घाटों पर 'अरिपन' (पारंपरिक रंगोली) बनाइए, सिंदूर लगाइए और रास्तों (पथिया) में दीये जलाकर रोशनी (इजोर) कीजिए।"

सुशांत अस्थाना द्वारा गाया गया यह गीत फिल्म 'मिथिला मखान' का है, जो घर से दूर रहने वाले हर व्यक्ति की आँखें नम कर देता है। जिस प्रकार मैथिली सोहर हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, उसी प्रकार यह गीत हमें हमारे आँगन की याद दिलाता है। अतुल्य भारत और बिहार पर्यटन भी इसी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे साहित्य अकादमी ने हमेशा सहेजा है।

उषा अर्घ्य देती महिला - हे छठि मैया हरु दुख मोर गीत का दृश्य
उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को नमन करते हुए श्रद्धालु, जो अपनी मनोकामनाओं और घर वापसी की उम्मीद लिए खड़े हैं।

▶️ छठी मईया का यह अद्भुत और भावुक वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ छठी मईया गीत से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

प्र 1: यह गीत किस फिल्म का है और इसे किसने गाया है?

उत्तर: यह भावुक गीत राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मैथिली फिल्म 'मिथिला मखान' (Mithila Makhaan) का है। इसे सुशांत अस्थाना ने अपनी मधुर आवाज़ दी है और इसके बोल विवेक रंजन तथा आदित्य कृष्णा ने लिखे हैं।

प्र 2: "कुसियार" (Kusiyar) और "अरिपन" (Aripan) का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'कुसियार' का अर्थ है ईख (Sugarcane), जो छठी मईया के प्रसाद का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। 'अरिपन' मिथिला की पारंपरिक रंगोली (Floor art) है, जिसे चावल के आटे के घोल (पिठार) से घाटों और आँगन में शुभ कार्यों के दौरान बनाया जाता है।

प्र 3: इस गीत में परदेसी का दर्द क्यों झलकता है?

उत्तर: छठ केवल एक पूजा नहीं है, यह जड़ों से जुड़ने का मौका है। जो लोग रोजी-रोटी के लिए बिहार और मिथिला से बाहर (परदेस) रहते हैं, वे इस समय अपने गाँव की मिट्टी, घाट की सजावट और परिवार के साथ बिताए पलों को सबसे ज्यादा याद करते हैं, जिसे इस गीत ने बखूबी दर्शाया है।

🙏 छठी मईया हर परदेसी को उसके अपनों से मिलाएँ!

छठ के यह अद्भुत गीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती, IGNCA और भारतीय संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से आज यह महापर्व पूरी दुनिया में गूंज रहा है। साहित्य अकादमी द्वारा सराही गई बिहार की संस्कृति को सहेजने का यह एक अनूठा प्रयास है। भारत सरकार भी इन लोक परंपराओं पर गर्व करती है।

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