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अपने तS जाइ छ हो भैया लिरिक्स: भाई-बहन का रुला देने वाला छठ गीत!

अपने तS जाइ छ हो भैया लिरिक्स (Apane Ta Jai Chha Ho Bhaiya)

छठ पूजा केवल एक आध्यात्मिक पर्व नहीं है; यह पारिवारिक संबंधों, विशेषकर भाई-बहन के अटूट प्रेम का सबसे बड़ा उत्सव है। जब एक बहन परदेस कमाने गए अपने भाई से छठ पूजा का प्रसाद (सनेस) लाने की गुहार लगाती है, तो उस संवाद की मार्मिकता किसी की भी आँखों में आँसू ला सकती है। "अपने तS जाइ छ हो भैया, देश रे बिदेशबा" गीत इसी निस्वार्थ प्रेम और छठी मईया के प्रति अटूट आस्था की कहानी है।

हमारे पिछले लेखों में, आपने "हमरो के पार लगैया परमेसरी मइया" और "हमरो पर होइयौ सहाय" के गहरे भावार्थ समझे। यह नया गीत रक्षाबंधन की भावुक कविताओं जैसी ही संवेदना जगाता है। मिथिलांचल की धरती से जुड़ा यह गीत हमें मिथिला के धिया सिया और हमर मनक गाँव की वह सोंधी महक याद दिलाता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस हृदयस्पर्शी लोकगीत के बोल और अर्थ में डूब जाएँ।

छठ पूजा में उषा अर्घ्य देती महिला - अपने तS जाइ छ हो भैया गीत का दृश्य
उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को नमन करती एक बहन, जो अपने परिवार और भाई की सलामती की प्रार्थना कर रही है।

🎶 अपने तS जाइ छ हो भैया (मूल मैथिली लिरिक्स)

अपने तS जाइ छ हो भैया, देश रे बिदेशबा
हमरो लय लबिहS भैया गहुमा सनेसबा
आबि गेलै हो भैया, छठि सनर बरतिया

गहुम तS छै गे बहिन, बड़ रे महगबा
छोड़ि दहिन गे बहिन, छठि सन बरतिया

दीनानाथ देलखिन हो भैया, भाइ रे भतिजबा
हम कोना छोड़बै हो भैया, छठि सन बरतिया

ससुरा मे देलखिन हो भैया, सासु-ससुरबा
आरो जे देलखिन हो भैया, सीथ भरि सिनुरबा
हँसैत कनैत रहै कोखि के बलकबा
हम कोना छोड़बै हो भैया, छठि सन बरतिया
करबै करबै हो भैया, छठि सन बरतिया

अपने तS जाइ छS भैया, देश रे बिदेशबा
हमरा लय लबिहS भैया, केरा सनेसबा ...
नेने अबिहS हो भैया, नारिकेर सनेसबा

नारिकेर तS छौ गे बहिन, बड़ रे महगबा
छोड़ि दहिन गे बहिन, छठि सन बरतिया

बेचि देबै हो भैया, हाथ के कंगनमा
खरीद लेबै हो भैया, केरा-नारिकेरबा
कैये लेबै हो भैया, छठि सन बरतिया

🎶 Apane Ta Jai Chha Ho Bhaiya (Hinglish Lyrics)

Apane ta jai chha ho bhaiya, desh re bideshaba
Hamro lay labiha bhaiya gahuma sanesba
Aabi gelai ho bhaiya, chhathi sanar baratiya

Gahum ta chhai ge bahin, bad re mahagaba
Chhodi dahin ge bahin, chhathi san baratiya

Deenanath delakhin ho bhaiya, bhai re bhatijaba
Ham kona chhodabai ho bhaiya, chhathi san baratiya

Sasura me delakhin ho bhaiya, saasu-sasurba
Aaro je delakhin ho bhaiya, seeth bhari sinurba
Hansait kanait rahai kokhi ke balakaba
Ham kona chhodabai ho bhaiya, chhathi san baratiya
Karabai karabai ho bhaiya, chhathi san baratiya

Apane ta jai chha bhaiya, desh re bideshaba
Hamra lay labiha bhaiya, kera sanesba ...
Nene abiha ho bhaiya, nariker sanesba

Nariker ta chhau ge bahin, bad re mahagaba
Chhodi dahin ge bahin, chhathi san baratiya

Bechi debai ho bhaiya, haath ke kanganma
Kharid lebai ho bhaiya, kera-narikerba
Kaiye lebai ho bhaiya, chhathi san baratiya

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

इस गीत में भाई और बहन के बीच का बहुत ही मार्मिक संवाद (Emotional Conversation) है, जो छठ पूजा के प्रति एक महिला की अटूट निष्ठा को दर्शाता है:

  • बहन की पुकार: बहन कहती है कि "हे भैया, आप देश-विदेश (परदेस) कमाने जाते हैं। छठ का महान पर्व आ गया है, मेरे लिए वहाँ से प्रसाद (सनेस) के रूप में गेंहूँ लेते आना।"
  • भाई की विवशता: भाई अपनी आर्थिक तंगी जताते हुए कहता है कि "हे बहन, गेंहूँ बहुत महँगा हो गया है। इस साल तुम छठ का व्रत छोड़ दो (छोड़ि दहिन गे बहिन)।"
  • बहन का जवाब (কৃতজ্ঞতা/Gratitude): बहन भावुक होकर जवाब देती है— "मैं यह व्रत कैसे छोड़ दूँ भैया? सूर्य देव (दीनानाथ) की कृपा से ही तो मुझे तुम जैसा भाई, भतीजा, सास-ससुर और मेरी मांग का सिंदूर मिला है। मेरे आँगन में जो बच्चे हँस-खेल रहे हैं, वह भी छठी मईया का ही आशीर्वाद है। मैं यह व्रत ज़रूर करूँगी।"
  • चरम त्याग (हाथ के कंगनमा): फिर वह केले और नारियल मँगवाती है। जब भाई फिर महँगाई की बात करता है, तो बहन कहती है— "हे भैया, अगर पैसे नहीं हैं तो मैं अपने हाथों के सोने के कंगन बेच दूँगी (बेचि देबै हो भैया, हाथ के कंगनमा), लेकिन केला-नारियल खरीद कर छठ का व्रत हर हाल में करूँगी!"

यही वह असीम आस्था और त्याग है, जो छठ को दुनिया का सबसे पवित्र पर्व बनाता है। इन गीतों की मिठास सुनकर हमें महाकवि विद्यापति की रचनाओं और मैथिली सोहर (Sohar) के लोक-साहित्य पर गर्व होता है। साहित्य अकादमी और संस्कृति मंत्रालय आज भी ग्रामीण महिलाओं द्वारा संजोये गए इस साहित्य का संरक्षण कर रहे हैं।

संध्या अर्घ्य देती महिला - अपने तS जाइ छ हो भैया गीत का दृश्य
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) के समय घाट पर दीप जलाते हुए श्रद्धालु, जहाँ छठी मईया के गीत गूंजते हैं।

▶️ छठी मईया का यह अद्भुत और भावुक वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ छठी मईया गीत से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

प्र 1: "सनेसबा" (Sanesba) का क्या अर्थ है?

उत्तर: मैथिली भाषा में 'सनेस' या 'सनेसबा' का अर्थ 'भेंट' या 'उपहार' (Gift/Offering) होता है। विशेष रूप से जब कोई परदेस से घर आता है और पूजा या अपनों के लिए कुछ लेकर आता है, तो उसे सनेस कहा जाता है।

प्र 2: गीत में "हाथ के कंगनमा" (Haath ke Kanganma) बेचने की बात क्यों कही गई है?

उत्तर: यह एक भारतीय नारी की अपनी आस्था के प्रति चरम पराकाष्ठा को दर्शाता है। वह आर्थिक तंगी से हार नहीं मानती; उसका मानना है कि जिस छठी मईया ने उसे सुहाग (कंगन) दिया है, उनकी पूजा के लिए वह अपना सबसे कीमती आभूषण भी बेच सकती है।

प्र 3: इस पर्व में भाई का क्या महत्व है?

उत्तर: छठ पर्व में भाई-बहन का संबंध बहुत गहरा होता है। बिहार पर्यटन और लोकमान्यताओं के अनुसार, अक्सर भाई ही अपनी बहन के घर दौरा (दउरा - प्रसाद की टोकरी) लेकर घाट तक जाते हैं।

🙏 छठी मईया आपके भाई-बहन के प्रेम को अमर रखें!

छठ के यह अद्भुत गीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। भारत सरकार और प्रवासी भारतीयों के कारण आज यह महापर्व पूरी दुनिया में जाना जाता है।

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