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बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ लिरिक्स: एक स्त्री की रुला देने वाली पुकार!

बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ लिरिक्स (Ber Ber Arajalaun He Dinanath)

मैथिली लोकगीतों में छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन के यथार्थ और एक स्त्री के संघर्ष का सबसे सच्चा दर्पण है। "बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ" एक ऐसा रुला देने वाला गीत है, जहाँ एक दुखी महिला भगवान भास्कर (दीनानाथ) से अपने पिछले जन्म के पापों और इस जन्म के दुखों का हिसाब मांगती है।

इससे पहले हमने "हाथ सटकुनियाँ हो दीनानाथ" में एक निस्संतान महिला (बाँझिन) का सामाजिक दर्द महसूस किया था। हमने "केरबा जे फड़ल छै घौद सँ" में पवित्रता के नियम, "डोमिन बेटी सुप नेने ठाढ़ छै" में समानता, और "अपने तS जाइ छ हो भैया" में पारिवारिक प्रेम को समझा। ये सभी गीत हमर मनक गाँव की वह सच्ची तस्वीरें हैं जो मिथिला के धिया सिया के जीवन को दर्शाती हैं। आइए, भारतीय संस्कृति के इस अत्यंत मार्मिक लोकगीत के गहरे अर्थ में गोता लगाएँ।

संध्या अर्घ्य देती महिला - बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ गीत का दृश्य
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) के समय घाट पर दीप जलाते हुए श्रद्धालु, जहाँ एक महिला सूर्य देव से अपने दुखों का कारण पूछ रही है।

🎶 बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ (मूल मैथिली लिरिक्स)

बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ तिरिया जनम जुनि देहु
तिरिया जनम जँ देलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ सुन्नरि रूप जुनि देहु

सुन्नरि रूप जँ देलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ अमरूख पुरुख जुनि देहु
अमरूख पुरुख जँ देलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ कोखिया बिहुन जुनि देहु

कोखिया बिहुन जँ केलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ सौतिन संग जुनि देहु
सौतिन संग जँ देलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ से कोन अपराध हम कयल

बड़ अपराध तोहें कयलS हे भक्तिन
भक्तिन सासुक निपल पयर देल
कोन अपराध हम केलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ सुन्नरि रूप जे देल

बड़ अपराध तोहें कयलS हे भक्तिन
भक्तिन ननदी पर अंगुरी उठौल
कोन अपराध हम केलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ अमूख पुरुख जे देल

बड़ अपराध तोहें कयलS हे भक्तिन
भक्तिन डाबा दूध पयर धोल
कोन अपराध हम केलौँ हे दीनानाथ
दीनानाथ कोखिया बिहुन जे कयल
बड़ अपराध तोहें कयलS हे भक्तिन
भक्तिन कोनियामे भाँटा तोड़ि लेल

🎶 Ber Ber Arajalaun He Dinanath (Hinglish Lyrics)

Ber-ber arajalaun he dinanath
Deenanath tiriya janam juni dehu
Tiriya janam jan delaun he dinanath
Deenanath sunnari roop juni dehu

Sunnari roop jan delaun he dinanath
Deenanath amarukh purukh juni dehu
Amarukh purukh jan delaun he dinanath
Deenanath kokhiya bihun juni dehu

Kokhiya bihun jan kelaun he dinanath
Deenanath sautin sang juni dehu
Sautin sang jan delaun he dinanath
Deenanath se kon aparaadh ham kayal

Bad aparaadh tohen kayala he bhaktin
Bhaktin saasuk nipal payar del
Kon aparaadh ham kelaun he dinanath
Deenanath sunnari roop je del

Bad aparaadh tohen kayala he bhaktin
Bhaktin nanadee par anguri uthaul
Kon aparaadh ham kelaun he dinanath
Deenanath amookh purukh je del

Bad aparaadh tohen kayala he bhaktin
Bhaktin daaba doodh payar dhol
Kon aparaadh ham kelaun he dinanath
Deenanath kokhiya bihun je kayal
Bad aparaadh tohen kayala he bhaktin
Bhaktin koniyaame bhaanta todi lel

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

यह लोकगीत एक दुखी स्त्री और भगवान दीनानाथ (सूर्य देव) के बीच का बहुत ही मार्मिक संवाद है। स्त्री अपने भाग्य पर विलाप कर रही है और भगवान उसे उसके पिछले कर्मों का कारण बता रहे हैं:

  • स्त्री की पीड़ा (तिरिया जनम): वह रोते हुए कहती है— "हे दीनानाथ! मैं बार-बार आपसे विनती करती हूँ कि मुझे स्त्री (तिरिया) का जन्म मत देना। अगर स्त्री का जन्म दे भी दिया, तो सुंदर रूप (सुन्नरि रूप) मत देना। अगर सुंदर रूप दिया, तो मुझे मूर्ख/अयोग्य पति (अमरूख पुरुख) मत देना। अगर मूर्ख पति दे भी दिया, तो मुझे निस्संतान (कोखिया बिहुन/Banjhin) मत रखना। और अगर कोख सूनी रख भी दी, तो मुझे सौतन (Sautin) का दुख मत देना। हे दीनानाथ, मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया है?"
  • भगवान का उत्तर - सौतन का दुख: दीनानाथ उत्तर देते हैं— "हे भक्तिन! तुमने बहुत बड़ा अपराध किया है। तुमने अपनी सास के लीपे हुए पवित्र स्थान पर पैर रख दिया था (सासुक निपल पयर देल), इसलिए तुम्हें सौतन का दुख मिला।"
  • सुंदर रूप और मूर्ख पति का कारण: "तुमने अपनी ननद पर उंगली उठाई थी (ननदी पर अंगुरी उठौल), इसलिए तुम्हें ऐसा जीवन मिला। तुमने बाएँ हाथ से दूध वाले बर्तन में पैर धो लिया था (डाबा दूध पयर धोल), इसलिए तुम्हें मूर्ख पति (अमूख पुरुख) मिला।"
  • निस्संतान (कोखिया बिहुन) होने का कारण: "और तुमने कोहनी से बैंगन (कोनियामे भाँटा तोड़ि लेल) तोड़ा था, जो कि एक अपशकुन माना जाता है, इसीलिए तुम्हें निस्संतान (कोखिया बिहुन) होने का दुख भोगना पड़ रहा है।"

इस गीत के माध्यम से ग्रामीण समाज में नैतिक मूल्यों और पारिवारिक सम्मान (सास-ननद का आदर) का महत्व सिखाया गया है। यह मैथिली सोहर और महाकवि विद्यापति की रचनाओं की तरह एक गहरा सामाजिक संदेश देता है, जिसे साहित्य अकादमी द्वारा सराहा जाता है। यह बिहार पर्यटन की वह सांस्कृतिक गहराई है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाती है।

उषा अर्घ्य देती महिला - बेर-बेर अरजलौँ हे दीनानाथ गीत का दृश्य
उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को नमन करती एक माँ, जो भगवान सूर्य से अपने सारे दुखों को दूर करने की प्रार्थना कर रही है।

▶️ छठी मईया का यह रुला देने वाला वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ छठी मईया गीत से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

प्र 1: "तिरिया जनम" (Tiriya Janam) का क्या अर्थ है?

उत्तर: मैथिली में 'तिरिया' का अर्थ 'स्त्री' या 'महिला' (Woman) होता है। गीत की शुरुआत में महिला भगवान से प्रार्थना कर रही है कि उसे अगले जन्म में स्त्री का रूप न दें, क्योंकि एक स्त्री का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण और दुखों से भरा होता है।

प्र 2: "अमरूख पुरुख" (Amarukh Purukh) किसे कहा गया है?

उत्तर: 'अमरूख' का अर्थ होता है मूर्ख या अयोग्य, और 'पुरुख' का अर्थ है पुरुष या पति। महिला अपनी व्यथा जताते हुए कहती है कि उसे एक ऐसा पति मिला है जो योग्य नहीं है, जिससे उसके जीवन का दुख और बढ़ गया है।

प्र 3: "कोनियामे भाँटा तोड़ि लेल" को अपराध क्यों माना गया है?

उत्तर: ग्रामीण लोक-मान्यताओं (Folk Beliefs) में कुछ कार्यों को अपशकुन माना जाता है। कोहनी (कोनिया) से बैंगन (भाँटा) तोड़ना एक ऐसा ही कृत्य माना गया है, जिसे भगवान ने गीत में एक अपराध बताया है जिसके कारण उसे निस्संतान रहने का दुख भोगना पड़ा।

🙏 सूर्य देव आपके सारे दुख दूर करें!

छठ के यह अद्भुत गीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती और भारत सरकार के प्रयासों से आज यह महापर्व पूरी दुनिया में गूंज रहा है। बिहार की संस्कृति को सहेजने का यह एक अनूठा प्रयास है।

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