उगह हो सूरज देव लिरिक्स (Ugaha Ho Suraj Dev Bhel Bhinsarva)
सूर्योदय का वह अलौकिक दृश्य जब लाखों हाथ एक साथ आसमान की ओर उठते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती स्वयं स्वर्ग बन गई हो। अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) जी की मर्मस्पर्शी आवाज़ में गाया गया— "उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा", छठ महापर्व का सबसे प्रतिष्ठित और हृदय को बेध देने वाला गीत है। यह गीत केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सूर्य देव से की गई सीधी गुहार है।
इससे पहले हमने "अंगना में पोखरी खनायब" में देखा कि कैसे घर के आँगन को ही पवित्र घाट बना दिया जाता है। इस गीत में भगवान भास्कर के प्रति जो आस्था और ऊर्जा निहित है, उसकी तुलना सीधे तौर पर "राम की शक्ति पूजा (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)" की असीम ऊर्जा और संकल्प से की जा सकती है।
निराला जी की रचना में जहाँ भगवान राम सूर्य की उपासना कर शक्ति का आह्वान करते हैं— "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन"— वहीं इस लोकगीत में समाज का सबसे वंचित वर्ग (निर्धन, कोढ़ी, नेत्रहीन) सूर्य देव से अपने कल्याण का आह्वान करता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस विश्वव्यापी गीत के बोल में डूब जाएँ।
🎶 उगह हो सूरज देव (मूल मैथिली-भोजपुरी लिरिक्स)
उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।
बड़की पुकारे देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।।
बाझिन पुकारें देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।
अन्हरा पुकारे देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।।
आ.. आ.. आ..
निर्धन पुकारे देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।
कोढ़िया पुकारे देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।।
लंगड़ा पुकारे देव दुनु कर जोरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।
उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा,
अरघ के रे बेरवा हो पूजन के रे बेरवा हो ।।
🎶 Ugaha Ho Suraj Dev (Hinglish Lyrics)
Uga He Suraj Dev Bhel Bhinsarva,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho |
Badki Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho ||
Baajhin Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho |
Anhara Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho ||
Aa.. Aa.. Aa..
Nirdhan Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho |
Kodhiya Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho ||
Langda Pukare Dev Dunu Kar Jorwa,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho |
Uga He Suraj Dev Bhel Bhinsarva,
Aragh Ke Re Berva Pujan Ke Re Berava Ho ||
🌸 उगह हो सूरज देव गीत का असली अर्थ और भावार्थ (Meaning & Analysis)
इस गीत की शुरुआत 'उगह हे सूरज देव भेल भिनसरवा' से होती है। यह गीत छठ पर्व की पूर्ण सामाजिक समानता (Social Equality) का सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण है। घाट पर खड़ा समाज का हर वंचित और दुखी वर्ग भगवान से एक समान भाव से प्रार्थना कर रहा है:
- परिवार का नेतृत्व (बड़की): सबसे पहले घर की 'बड़की' (बड़ी बहू या बड़ी बहन) दोनों हाथ जोड़कर (दुनु कर जोरवा) सूर्य देव को पुकारती है, क्योंकि अर्घ्य और पूजन की वेला (बेरवा) हो चुकी है।
- मातृत्व की करुण पुकार: इसके बाद, 'बाझिन' (निस्संतान महिला) भी दोनों हाथ जोड़कर सूर्य देव को पुकारती है, ताकि उसकी गोद भर सके और समाज के तानों से उसे मुक्ति मिले।
- शारीरिक पीड़ा से मुक्ति: इसके बाद, 'अन्हरा' (नेत्रहीन व्यक्ति) सूर्य देव से दृष्टि की आस में प्रार्थना करता है।
- वंचितों की पुकार (निर्धन, कोढ़िया, लंगड़ा): इसके अलावा निर्धन (गरीब), कोढ़िया (कुष्ठ रोगी) और लंगड़ा व्यक्ति भी अपने-अपने दुखों के निवारण के लिए सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं।
इस गीत में "भिनसरवा" (Bhinsarva) शब्द का प्रयोग हुआ है, जो मुख्य रूप से भोजपुरी और बज्जिका (Bhojpuri/Bajjika) बोलियों का प्रभाव है। जबकि शुद्ध मैथिली में इसे "भिनसर" (Bhinsar) कहा जाता है। यह भाषाई मिश्रण इस बात का प्रमाण है कि छठ पूजा अवधी, भोजपुरी और मैथिली की भाषाई सीमाओं को तोड़कर एक साझी सांस्कृतिक भावना (Shared Cultural Emotion) का निर्माण करती है।
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❓ गीत से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र 1: "भेल भिनसरवा" (Bhel Bhinsarva) का क्या अर्थ है?
भेल भिनसरवा का अर्थ है 'सुबह (भोर) हो चुकी है'। यह मैथिली, बज्जिका और भोजपुरी भाषा का एक बहुत ही मीठा शब्द है। इस गीत में व्रती सूर्य देव से कहती हैं कि हे प्रभु, सुबह हो चुकी है, अब आप कृपया उदित होइए क्योंकि अर्घ्य का समय हो गया है।
प्र 2: इस गीत में 'कोढ़िया' और 'लंगड़ा' का उल्लेख क्यों है?
प्राचीन काल से ही वेदों में सूर्य देव को 'आरोग्य' (Health) का देवता माना गया है। गीत में यह बताया गया है कि सूर्य की उपासना से असाध्य रोग (जैसे कुष्ठ रोग) और शारीरिक अक्षमता भी ठीक हो सकती है। यह इस बात का प्रमाण है कि भगवान के दरबार में समाज का सबसे उपेक्षित वर्ग भी सीधा संवाद कर सकता है।
प्र 3: "दुनु कर जोरवा" (Dunu Kar Jorwa) का क्या तात्पर्य है?
'दुनु' का अर्थ है 'दोनों' और 'कर' का अर्थ है 'हाथ'। इसका मतलब है कि सभी भक्त अपने दोनों हाथ जोड़कर पूर्ण समर्पण और परम श्रद्धा के साथ भगवान भास्कर को पुकार रहे हैं।
🙏 सूर्य देव आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें!
अनुराधा पौडवाल जी द्वारा गाया गया यह गीत भारतीय लोक-साहित्य और अतुल्य भारत की धरोहर है। प्रसार भारती और IGNCA के संरक्षण से आज हमारी मौखिक लोक-परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। भारत सरकार इन सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
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