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अंगना में पोखरी खनायब छठि मैया लिरिक्स: सबसे पावन स्वागत गीत!

अंगना में पोखरी खनायब छठि मैया लिरिक्स (Chhathi Maiya Ayetan Aaj)

जब घर-आँगन में साफ़-सफाई शुरू हो जाती है और हवाओं में एक पवित्र मिठास घुल जाती है, तो समझ लीजिए कि महापर्व छठ का समय आ गया है। छठी मईया के आगमन की खुशी और उनके सत्कार को दर्शाता यह अत्यंत लोकप्रिय लोकगीत— "अंगना में पोखरी खनायब, छठि मैया अयतन आय", हर व्रती के हृदय की सच्ची भावना है।

हमारे पिछले लेखों में आपने "आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ" में भगवान के चमत्कारों को देखा और "मांगीला हम बरदान हे गंगा मैया" में एक सुहागिन की आदर्श परिवार की कामना को समझा। यह गीत उसी मिथिला की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है, जहाँ देवों को घर के आँगन में ही आमंत्रित किया जाता है। आइए, भारतीय संस्कृति के इस मधुर गीत के हर एक शब्द में बसने वाले समर्पण को महसूस करें।

प्रातःकाल उषा अर्घ्य देती महिला - अंगना में पोखरी खनायब गीत
उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को नमन करते हुए श्रद्धालु, जो छठी मईया के अपने आँगन में पधारने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

🎶 अंगना में पोखरी खनायब (मूल लिरिक्स)

अंगना में पोखरी खनायब
छठि मैया अयतन आय
छठि मैया अयतन आय

दुअरा पर तमुआ तनायब
छठि मैया अयतन आय
छठि मैया अयतन आय

आँचरा से गलिया बहारब
आँचरा से गलिया बहारब
छठि मैया अयतन आय
छठि मैया अयतन आय

केलवा डाला भरि लायब
तइ पर पीयरि ओढ़ायब
तइ पर पीयरि ओढ़ाय
हाथी पर कलसा बैठायब
तइ पर दीया जगमगाय
तइ पर दीया जगमगाय
तइ पर दीया जगमगाय

🎶 Angana Mein Pokhari Khanayab (Hinglish Lyrics)

Angana mein pokhari khanayab
Chhathi maiya ayetan aay
Chhathi maiya ayetan aay

Duara par tamua tanayab
Chhathi maiya ayetan aay
Chhathi maiya ayetan aay

Aanchara se galiya bahaarab
Aanchara se galiya bahaarab
Chhathi maiya ayetan aay
Chhathi maiya ayetan aay

Kelawa daala bhari laayab
Tai par peeyari odhaayab
Tai par peeyari odhaay
Haathi par kalasa baithaayab
Tai par deeya jagamagaay
Tai par deeya jagamagaay
Tai par deeya jagamagaay

🌸 गीत का संपूर्ण हिंदी भावार्थ (Meaning & Explanation)

यह लोकगीत एक व्रती महिला की अपार श्रद्धा का प्रतीक है, जो छठी मईया के स्वागत के लिए अपने घर-आँगन को ही घाट में तब्दील कर रही है:

  • आँगन में पोखर का निर्माण: व्रती कहती है कि आज मेरे आँगन में ही पोखर (छोटा तालाब) खोदा जाएगा, और घर के दरवाज़े (दुअरा) पर तंबू (तमुआ) ताना जाएगा, क्योंकि आज छठी मईया स्वयं मेरे घर पधारने वाली हैं (अयतन आय)।
  • आँचल से रास्तों की सफाई: उसकी आस्था की चरम सीमा यह है कि वह कहती है— "मईया जिस रास्ते से आएँगी, मैं उन गलियों को झाड़ू से नहीं, बल्कि अपने आँचल (आँचरा) से बुहारूंगी (बहारब/साफ करूंगी)।" यह एक माँ का ईश्वरीय शक्ति के प्रति पूर्ण समर्पण है।
  • डाला और पियरी का अर्पण: वह केले (केलवा) से भरे हुए डाले लेकर आएगी और उसे एक पवित्र पीले रंग के वस्त्र (पीयरि) से ढक देगी, जो शुद्धता और शुभता का प्रतीक है।
  • हाथी पर कलश और दीया: अंत में, वह मिट्टी से बने हाथी की मूर्ति पर पवित्र कलश (कलसा) स्थापित करेगी और उसके ऊपर एक जगमगाता हुआ दीया रखेगी, ताकि माता के मार्ग और घर में हमेशा रोशनी बनी रहे।

इस गीत की हर पंक्ति इस बात का प्रमाण है कि बिहार की धरती और इसके लोकगीतों में ईश्वर को परिवार का एक हिस्सा माना जाता है। बिहार पर्यटन भी इस सांस्कृतिक जुड़ाव को विश्व पटल पर रखता है। यह गीत बिल्कुल उन छठ गीतों (हे छठि मैया हरु दुख मोर) की तरह है, जहाँ लोग अपनी माटी की खुशबू को याद करते हैं। साहित्य अकादमी और IGNCA द्वारा संरक्षित ये गीत हमारी सबसे अमूल्य धरोहर हैं।

संध्या के समय दीप जलाती महिला - अंगना में पोखरी खनायब गीत का दृश्य
संध्या बेला में घाट पर दीप जलाकर छठी मईया के अपने घर पधारने की कामना करती हुई एक सुहागिन।

▶️ छठी मईया का यह अद्भुत और भावुक वीडियो देखें

इस वीडियो को प्ले करें और इस पावन गीत के सुरों में खो जाएँ।

❓ लोकगीतों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र 1: "पोखरी खनायब" (Pokhari Khanayab) का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'पोखरी' का अर्थ है 'छोटा तालाब' और 'खनायब' का अर्थ है 'खुदाई करना'। छठ पूजा के लिए कई लोग (जो नदियों तक नहीं जा सकते) अपने घर के आँगन या छतों पर कृत्रिम जल-कुंड (तालाब) बनाते हैं ताकि वे पूर्ण पवित्रता के साथ अर्घ्य दे सकें।

प्र 2: "आँचरा से गलिया बहारब" क्यों कहा गया है?

उत्तर: यह एक व्रती की चरम श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि वह रास्तों को झाड़ू से नहीं, बल्कि अपने आँचल (साड़ी के पल्लू) से साफ करेगी, ताकि माता के आने वाले रास्ते में कोई भी सांसारिक अशुद्धता न रहे।

प्र 3: "हाथी पर कलसा" का क्या मतलब है?

उत्तर: बिहार की संस्कृति में पूजा के दौरान मिट्टी से बने हाथी (Elephant figurines) रखे जाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। व्रती कहती है कि वह उसी पवित्र मिट्टी के हाथी पर जल से भरा कलश स्थापित करेगी और उसके ऊपर दीप जलाएगी।

🙏 छठी मईया आपके घर-आँगन में सुख और समृद्धि लाएँ!

भारतीय लोकगीत अतुल्य भारत की धरोहर हैं। प्रसार भारती और भारत सरकार के प्रयासों से आज हमारी मौखिक लोक-परंपराओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। भारत सरकार इन सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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