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मैथिली विवाह गारी गीत 2026: शादी में गाए जाने वाले पारंपरिक गीत और लिरिक्स

मैथिली विवाह गारी गीत 2026: शादी में गाए जाने वाले मीठे और पारंपरिक गारी गीत

मिथिलांचल और बिहार की शादियों में अगर दूल्हे और बारातियों को महिलाओं द्वारा 'गारी' (मीठी गालियां) न गाकर सुनाई जाएं, तो शादी बिल्कुल अधूरी सी लगती है। यह एक ऐसी अनोखी परंपरा है जहाँ गालियों पर कोई गुस्सा नहीं करता, बल्कि ठहाके लगाकर हंसता है!

द्वार पूजा से लेकर मंडप (मड़वा) और बारातियों के भोजन (ज्योनार/जेवनार) तक, हर रस्म में maithili vivah gari geet lyrics का अपना एक अलग ही मजा है। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि दो अजनबी परिवारों के बीच की झिझक को तोड़ने का एक खूबसूरत मनोवैज्ञानिक तरीका है।

🤔 क्या आप जानते हैं 'गारी गीत' की शुरुआत कहां से हुई?

मान्यता है कि जब त्रेता युग में भगवान राम बारात लेकर राजा जनक के दरबार (जनकपुर) पहुंचे थे, तो वहां की महिलाओं ने भी राम जी और राजा दशरथ को गारी गीत गाकर छेड़ा था। तभी से शादी गारी गीत लिरिक्स मिथिला संस्कृति का अभिन्न अंग बन गए हैं।

Maithili Vivah Gari Geet Lyrics - शादी गारी गीत
विवाह के अवसर पर गारी (गाली) गीत गाकर दूल्हे और बारातियों से हंसी-मजाक करती महिलाएं।

Top 3 Maithili Vivah Gari Geet (दूल्हा और समधी गारी गीत)

अगर आप अपनी घर की शादियों के लिए maithili shadi geet lyrics ढूंढ रहे हैं, तो नीचे दिए गए सबसे मशहूर गारी गीतों की पंक्तियां जरूर देखें। (आप इन गीतों के पूर्ण संस्करण इंटरनेट या यूट्यूब पर इनके बोल लिखकर आसानी से खोज सकते हैं)।

1. समधी गारी गीत (भोजन/जेवनार के समय)

जब बारात भोजन (ज्योनार) करने बैठती है, तो वधु पक्ष की महिलाएं समधी (दूल्हे के पिता) को निशाना बनाकर यह गीत गाती हैं।

हमरा अंगना में आयल बानर दल हो,
खाए-पिए में ई सब बड़का मल्ल हो।
समधी जी के तोंद जइसे फुटहा ढोलक,
देखि के हंसेला सगरी टोल हो...

भावार्थ: महिलाएं मजाकिया लहजे में बारातियों को वानर सेना कहती हैं, जो खाने-पीने में बहुत आगे हैं। समधी जी के बड़े पेट की तुलना टूटे हुए ढोलक से की जाती है, जिसे देखकर पूरा गांव हंसता है।

2. दूल्हा गारी गीत (Dulha Gari Geet)

मंडप (मड़वा) में जब दूल्हा बैठा होता है, तो उसे छेड़ने के लिए यह गीत गाया जाता है।

चुन-चुन गारी देबय हे,
बबुआ दूल्हा के...
कारी-कारी दूल्हा के गोरकी कनिया,
जइसे अन्हरिया में चमके बिजुरिया...

भावार्थ: सखियां दूल्हे को चिढ़ाते हुए गाती हैं कि हम चुन-चुन कर दूल्हे को गालियां देंगी। वह कहती हैं कि हमारा दूल्हा सांवला (काला) है और दुल्हन गोरी है, ठीक वैसे ही जैसे अंधेरी रात में बिजली चमकती है। (दुल्हन के मंडप में आगमन पर गाए जाने वाले अत्यंत मधुर गीत दुल्हिन धीरे धीरे चल गीत लिरिक्स को भी जरूर पढ़ें।)

3. द्वार पूजा गारी (बारात आगमन)

जैसे ही बारात दरवाजे पर लगती है, यह चटपटा लोकगीत गूंजने लगता है।

कहाँ सँ आयल ई छनहटा बरियाती,
नहाइल न खाइल, बस मांगेला राती।
समधी के मूंछ जइसे झाड़ू के सींक,
दूल्हा के देखि के आवेला छींक...

भावार्थ: महिलाएं पूछती हैं कि ये भूखे-प्यासे बाराती कहां से आ गए हैं? समधी की मूंछों को झाड़ू की तीली जैसा बताया जाता है और मजाक में कहा जाता है कि दूल्हे की शक्ल देखकर ही छींक आ रही है।

संस्कृति के अन्य महत्वपूर्ण गीत (Must Read)

शादी के अलावा भी मिथिला में विभिन्न अवसरों पर पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। यदि आप लोकगीतों में रुचि रखते हैं, तो हमारे अन्य लेख भी पढ़ें:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: शादी में 'गारी गीत' (Gaali Songs) क्यों गाए जाते हैं?

गारी गीत विवाह में दो नए परिवारों के बीच की झिझक, घबराहट और तनाव को दूर करने (Ice-breaking) का काम करते हैं। इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं होती, बल्कि यह शुद्ध हास्य और मनोरंजन का हिस्सा है।

Q2: गारी गीत मुख्य रूप से कब गाए जाते हैं?

ये गीत द्वार पूजा, मटकोर, मड़वा (मंडप छादन), सिंदूरदान और विशेष रूप से तब गाए जाते हैं जब बाराती भोजन (जेवनार) करने के लिए बैठते हैं।

Q3: क्या दूल्हे का परिवार इन गालियों का बुरा मानता है?

बिल्कुल नहीं! मिथिला और बिहार-यूपी की संस्कृति में गारी सुनना एक सम्मान माना जाता है। कहा जाता है कि बिना गारी खाए शादी संपन्न नहीं होती। बाराती इसे बहुत आनंद के साथ सुनते हैं।

विवाह के ये गारी गीत हमारी लोक संस्कृति की वह मिठास हैं, जो पीढ़ियों को जोड़े रखती है।

यदि आपके घर में भी शादी है, तो इन Maithili Vivah Gari Geet Lyrics को अपनी बुआ, मौसी और बहनों के साथ जरूर शेयर करें!

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