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बच्चे की छठी के गीत 2026: 5 शुभ मैथिली सोहर लिरिक्स और हिंदी अर्थ

बच्चे की छठी के गीत 2026: शुभ मैथिली सोहर लिरिक्स और हिंदी अर्थ

बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा उत्सव होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्म के ठीक छठे दिन (Chhathi) का ही सबसे अधिक महत्व क्यों होता है?

माना जाता है कि छठी की रात को स्वयं 'विधाता' (ब्रह्मा जी) नवजात शिशु के माथे पर उसका भविष्य और भाग्य लिखने आते हैं। इसी रात को जगाने और शिशु को बुरी नजर से बचाने के लिए महिलाएं रात भर जागकर bachche ki chhathi ke geet lyrics गाती हैं, जिन्हें हम 'सोहर' कहते हैं।

✨ क्या आपके घर में भी नन्हा मेहमान आया है?

तो आपको इंटरनेट पर इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। इस लेख में हम आपके लिए लाये हैं maithili sohar geet lyrics का वो प्रामाणिक खजाना, जिसे गाकर आपकी दादी-नानी ने पीढ़ियों को आशीर्वाद दिया है। आइए जानते हैं इन गीतों का असली अर्थ!

Bachche ki chhathi ke geet lyrics - Maithili Sohar
नवजात शिशु की छठी के पावन अवसर पर सोहर गाकर मंगलकामना करतीं महिलाएं।

पारंपरिक छठी के गीत (Top Sohar Lyrics)

नीचे दिए गए ये छठी के पारंपरिक गीत सदियों से मिथिला और बिहार-यूपी के आंगनों में गूंज रहे हैं।

1. जुग जुग जिया सु ललनवा (सबसे लोकप्रिय सोहर)

बिना इस गीत के कोई भी छठी या नामकरण संस्कार पूरा नहीं माना जाता। यह बच्चे को लंबी आयु का आशीर्वाद देने का सबसे मधुर गीत है।

जुग जुग जिया सु ललनवा,
भवनवा के भाग जागल हो...
ललना लाल होइहे कुलवा के दीपक,
मनवा में आस लागल हो...

हिंदी अर्थ: हे ललना (बच्चे), तुम युगों-युगों तक जियो। तुम्हारे आने से इस पूरे घर-आंगन का भाग्य जाग गया है। तुम बड़े होकर अपने कुल (परिवार) के दीपक बनोगे और हमारे कुल का नाम रोशन करोगे, मेरे मन में यही आशा जागी है।

🔗 जुग जुग जिया सु ललनवा का संपूर्ण गीत और अर्थ यहाँ पढ़ें। (Link to your dedicated article)

2. सोने के खटोला (Sone Ke Khatola)

जब छठी के दिन बच्चे को पहली बार नए कपड़े पहनाकर पलने में डाला जाता है, तब यह सोहर गाया जाता है।

सोने के खटोला, रेशम के डोरिया,
तापर सुतल होनहार बबुआ...
ललना केकर हे दुलरुवा,
त केकर हे नयनवा के तारा...

हिंदी अर्थ: सोने का खटोला (पलना) है और उसमें रेशम की डोरी बंधी है, जिस पर हमारा होनहार बच्चा सोया हुआ है। हे ललना, तुम किसके इतने दुलारे हो और किसके आंखों के तारे हो? (गीत की अगली पंक्तियों में माता-पिता और दादा-दादी का नाम लिया जाता है)।

3. अँगना में बजइ छै बधैया (मैथिली सोहर)

यह एक पारंपरिक maithili sohar geet lyrics है जो घर में बजने वाली शहनाई और उत्सव का वर्णन करता है।

आजू मिथिला नगरिया निहाल सखिया,
अँगना में बजइ छै बधैया हो...
ललना जन्म लेलें दसरथ जी के अंगना,
चारू दिसि छायल आनंदवा हो...

हिंदी अर्थ: हे सखियों, आज हमारा यह आंगन (और मिथिला नगरी) निहाल हो गया है। घर में बधाइयां बज रही हैं। जिस तरह राजा दशरथ के आंगन में राम जी ने जन्म लिया था, उसी तरह हमारे घर में भी लाल (बच्चे) का जन्म हुआ है और चारों दिशाओं में आनंद छा गया है।

लोकगीतों की कड़ी: सोहर से विवाह तक

जन्म का सोहर हो या विवाह की गालियां, मिथिला की लोक संस्कृति हर अवसर को संगीतमय बना देती है। छठी के इन मीठे गीतों के बाद, जब यही बच्चा बड़ा होकर विवाह के मंडप में बैठता है, तो उसे 'गारी' (मीठी गालियां) गाकर छेड़ा जाता है।

👉 इसे भी पढ़ें: मैथिली विवाह गारी गीत 2026: शादी में गाए जाने वाले पारंपरिक गीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: छठी कब और क्यों मनाई जाती है?

शिशु के जन्म के ठीक छठे दिन छठी मनाई जाती है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिशु पर संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता था, इसलिए रात भर जागकर (रतजगा करके) देवी-देवताओं के सोहर गाए जाते हैं ताकि शिशु सुरक्षित रहे। इसे विधाता के आगमन की रात भी माना जाता है।

Q2: 'सोहर' किसे कहते हैं?

सोहर वे पारंपरिक लोकगीत हैं जो विशेष रूप से संतान के जन्म, नामकरण, छठी और मुंडन संस्कार के अवसर पर गाए जाते हैं। इनमें राम-कृष्ण के जन्म की कथाओं का वर्णन होता है।

Q3: क्या सोहर केवल लड़कों के जन्म पर गाए जाते हैं?

प्राचीन काल में ऐसा होता था, लेकिन आधुनिक समय में बेटों और बेटियों दोनों के जन्म पर समान उत्साह के साथ मैथिली सोहर गीत गाए जाते हैं।

ये सोहर मात्र गीत नहीं, बल्कि पीढ़ियों का आशीर्वाद हैं।

यदि आपके परिवार में भी किसी बच्चे का जन्म हुआ है, तो इन bachche ki chhathi ke geet lyrics को अपनी दादी-नानी और परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप्स में जरूर साझा करें!

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